AI के युग में हिंदी का स्वरूप बदला, महत्व नहीं:उदित नारायण पीजी कॉलेज में संगोष्ठी, टेक्निक को अवसर बताया


कुशीनगर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते असर के बावजूद हिंदी की सांस्कृतिक जड़ें, साहित्यिक समृद्धि और मानवीय भावनाएं आज भी बरकरार हैं। वक्ताओं ने कहा कि तकनीक और हिंदी को मिलाकर इसे नए दौर की असरदार भाषा बनाया जा सकता है। यह बात मंगलवार को पडरौना के उदित नारायण पीजी कॉलेज में हिंदी दिवस पर हुई एक संगोष्ठी में कही गई। मंगलवार सायं 4 बजे तक चले संगोष्ठी को कॉलेज के हिंदी विभाग और भाषा परिषद ने मिलकर आयोजित की थी। इसका विषय था “कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में हिंदी भाषा का बदलता स्वरूप”। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. ममता मणि त्रिपाठी ने की। पूर्व विभागाध्यक्ष और सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ. प्रेमचंद्र सिंह मुख्य अतिथि थे, जबकि किसान पीजी कॉलेज, सेवरही के सहायक आचार्य डॉ. योगेंद्र प्रताप सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। मुख्य अतिथि डॉ. प्रेमचंद्र सिंह ने हिंदी की सरलता, सहजता और राजभाषा के तौर पर इसके महत्व पर बात की। उन्होंने बताया कि हिंदी को किसी एक व्यक्ति ने नहीं बनाया, बल्कि यह अपने बड़े जनसमर्थन, साहित्य और बात कहने की ताकत के कारण खुद स्थापित हुई है। उन्होंने मलिक मोहम्मद जायसी की ‘पद्मावत’ का उदाहरण देते हुए कहा कि साहित्य में मानवीय भावनाएं और आत्मीयता जिस स्तर की होती है, वहां AI की पहुंच सीमित है। AI भाषा तो बना सकता है, लेकिन मानवीय अनुभव से निकलने वाली आत्मीय संवेदनाएं आसानी से नहीं ला सकता। इसलिए AI का इस्तेमाल सिर्फ एक सहायक तकनीक के रूप में करना चाहिए। हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. विजय प्रताप निषाद ने कहा कि अभी का समय तकनीकी बदलाव और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का है। ऐसे में हिंदी के स्वरूप और इस्तेमाल में बदलाव आना स्वाभाविक है। उन्होंने हिंदी को आधुनिक तकनीक से जोड़कर ज्ञान-विज्ञान और डिजिटल दुनिया की असरदार भाषा बनाने पर जोर दिया। डॉ. अरुण कुमार, डॉ. राजेश कुमार और डॉ. अश्विनी यादव ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि दूसरी भाषाएं हमें दुनिया से जोड़ती हैं, जबकि हिंदी हमें अपनी जड़ों से जोड़ती है। सारस्वत अतिथि कवि एवं पूर्व शिक्षक रामकृष्ण यादव ‘वैफरल’ ने हिंदी को संवेदना, संस्कृति और आत्म-अभिव्यक्ति की सशक्त भाषा बताया। इस दौरान उनके कविता संग्रह ‘हम पीकर बेहतर रहते हैं’ का अतिथियों और प्राध्यापकों ने विमोचन किया। सेवानिवृत्त शिक्षक राघव तिवारी ने कविता गायन प्रस्तुत किया। बीए तृतीय वर्ष की छात्रा प्रीति ने स्वरचित कविता का भावपूर्ण गायन किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. अनूप पटेल ने हिंदी दिवस की प्रासंगिकता बताते हुए विद्यार्थियों से हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग और साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। संचालन डॉ. विजय प्रताप निषाद और डॉ. आनंद कुमार गोंड ने किया।

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