AI के युग में हिंदी का स्वरूप बदला, महत्व नहीं:उदित नारायण पीजी कॉलेज में संगोष्ठी, टेक्निक को अवसर बताया
कुशीनगर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते असर के बावजूद हिंदी की सांस्कृतिक जड़ें, साहित्यिक समृद्धि और मानवीय भावनाएं आज भी बरकरार हैं। वक्ताओं ने कहा कि तकनीक और हिंदी को मिलाकर इसे नए दौर की असरदार भाषा बनाया जा सकता है। यह बात मंगलवार को पडरौना के उदित नारायण पीजी कॉलेज में हिंदी दिवस…