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लखनऊ के भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के सुजान सभागार में सोमवार को हिंदी दिवस पर काव्य-पाठ और व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने स्वरचित और प्रसिद्ध कवियों की रचनाओं का पाठ किया। इस मौके पर काव्य-पाठ में बीपीए प्रथम सेमेस्टर की छात्रा खुशी ने स्वरचित कविता ‘कभी बिछड़े’ सुनाई। एमपीए तृतीय सेमेस्टर के छात्र शिवम मौर्य ने शिवमंगल सिंह सुमन की रचना ‘वरदान मांगूंगा नहीं’ का पाठ किया। बीपीए छात्र विनोद कुमार ने कुमार विश्वास की रचना प्रस्तुत की। छात्र आदर्श पाठक ने ‘हिंदी से ही शरमाते हैं’ व्यंग्यात्मक काव्य सुनाकर श्रोताओं को भाषा के प्रति सोचने का संदेश दिया। हिन्दी भावनात्मक एकता को जोड़ने वाली भाषा है तालवाद्य विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार मिश्र ने हिंदी के महत्व पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी सिर्फ संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, साहित्य और भावनात्मक एकता को जोड़ने वाली भाषा है। विद्यार्थियों को हिंदी के अधिक प्रयोग और साहित्य के अध्ययन के लिए प्रेरित किया। अध्ययन में हिंदी भाषा और साहित्य का प्रयोग जरूरी कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने कहा कि संगीत और कला के अध्ययन-अध्यापन में हिंदी भाषा और साहित्य का प्रयोग जरूरी है। विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। कुलसचिव अतुल कुमार ने कहा कि हिंदी अभिव्यक्ति के साथ संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का माध्यम है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच देने के साथ भाषा के प्रति रुचि और सम्मान बढ़ाते हैं।
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भातखंडे विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस मनाया:विद्यार्थियों ने अपनी और प्रसिद्ध रचनाएं सुनाईं