4 मिनट पहले
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ISRO के नौ कर्मचारी संगठनों ने स्पेस एजेंसी के चेयरपर्सन वी. नारायणन को पत्र लिखकर प्राइवेटाइजेशन पर स्पष्टीकरण मांगा है। यह लेटर 4 सितंबर को लिखा गया। जानकारी आज सामने आई है।
कर्मचारियों ने लेटर में ISRO की मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेशनल काम निजी कंपनियों को सौंपने की प्रस्तावित योजना पर आधिकारिक जवाब मांगा है।
संगठनों ने भविष्य की भूमिका, मौजूदा कर्मचारियों पर असर और आगे होने वाली भर्ती को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
यह पत्र 21 अगस्त को IN-SPACe चेयरपर्सन पवन गोयनका की टिप्पणी के बाद लिखा गया है। IN-SPACe निजी क्षेत्र की अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने, मंजूरी देने और उनकी निगरानी का काम करता है।
एक कार्यक्रम में गोयनका ने कथित तौर पर कहा था, “आखिरकार, ISRO कोई लॉन्च व्हीकल नहीं बनाएगा और न ही किसी लॉन्च व्हीकल का निर्माण करेगा। यह सब निजी क्षेत्र या PSU करेगा।”
कर्मचारी संगठन बोला- ISRO को सिर्फ रिसर्च एंड डेवलपमेंट तक सीमित न किया जाए
कर्मचारी संगठनों ने कहा कि तय व्यावसायिक कामों में निजी कंपनियों की भागीदारी हो सकती है, लेकिन ISRO मजबूत और सरकारी स्वामित्व वाला संगठन बना रहना चाहिए।
लेकिन बिना चर्चा के ऐसी नीति स्वीकार नहीं की जा सकती, जिसमें ISRO को केवल सीमित रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) संस्था तक सीमित कर दिया जाए।
और देश के लॉन्च व्हीकल बनाने तथा लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर चलाने का काम सार्वजनिक क्षेत्र से बाहर चला जाए।
कर्मचारियों ने पारदर्शिता की मांग की
कर्मचारी संगठनों ने कहा कि पवन गोयनका की टिप्पणियों के बाद डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस की ओर से कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं की गई है।
इसमें यह नहीं बताया गया है कि नीति को मंजूरी मिली है या नहीं, इसका कानूनी और प्रशासनिक आधार क्या है, इसे किस चरण में लागू किया जाएगा और मौजूदा कर्मचारियों व भविष्य में सार्वजनिक भर्ती पर इसका क्या असर पड़ेगा।
पत्र में कहा गया है, “ISRO की विकसित की गई तकनीक राष्ट्रीय संपत्ति है। इसका ट्रांसफर पारदर्शी और जवाबदेह होना चाहिए।
इसे रणनीतिक, सुरक्षा और रोजगार से जुड़े पहलुओं के अनुरूप किया जाना चाहिए। कर्मचारियों को इसकी जानकारी अखबारों में छपी खबरों के जरिए नहीं दी जानी चाहिए।”
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