Sambhal Jama Masjid & Harihar Mandir Dispute

सनी गुप्ता, संभल5 मिनट पहले

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संभल की शाही जामा मस्जिद और श्रीहरिहर मंदिर विवाद पर मंगलवार, 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ कोर्ट नंबर-5 में मामले की सुनवाई करेगी।

जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी और जामा मस्जिद ट्रस्ट ने मामले में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले दोनों पक्षों को आपसी सहमति से एक ही याचिका के जरिए सुनवाई कराने का सुझाव दिया था।

हालांकि, दोनों पक्ष इस पर सहमत नहीं हुए। जामा मस्जिद ट्रस्ट के अध्यक्ष मोहम्मद काशिफ खान के मुताबिक, उनके अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट में ट्रस्ट का पक्ष रखा। ट्रस्ट ने आपसी समझौते के सुझाव को स्वीकार नहीं किया है।

19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष ने संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर बताते हुए सर्वे कराने की मांग की थी।

19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष ने संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर बताते हुए सर्वे कराने की मांग की थी।

कई बार टल चुकी है सुनवाई

जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली ने 14 जुलाई को बताया था कि कुछ जरूरी दस्तावेज दाखिल करने के लिए कोर्ट से समय मांगा गया था। कोर्ट ने अनुरोध स्वीकार करते हुए 28 जुलाई की तारीख तय की थी।

इसके बाद 18 अगस्त को इंतजामिया कमेटी और हिंदू पक्ष के अधिवक्ता कोर्ट में पेश नहीं हुए। इस वजह से सुनवाई 25 अगस्त तक टाल दी गई। 25 अगस्त को भी सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद अगली तारीख 1 सितंबर तय की गई।

हाईकोर्ट के आदेश को दी गई चुनौती

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 18 मई 2024 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हो रही है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने चंदौसी की सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें शाही जामा मस्जिद और श्रीहरिहर मंदिर विवाद में सर्वे कराने का आदेश दिया गया था।

हाईकोर्ट ने मस्जिद कमेटी की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद कमेटी ने 1 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। इसे 5 अगस्त को रजिस्टर्ड किया गया था।

23 नवंबर 2025 को तत्कालीन एसपी केके विश्नोई और प्रशासनिक अधिकारियों ने सर्वे से पहले विवादित स्थल का निरीक्षण किया था।

23 नवंबर 2025 को तत्कालीन एसपी केके विश्नोई और प्रशासनिक अधिकारियों ने सर्वे से पहले विवादित स्थल का निरीक्षण किया था।

19 नवंबर 2024 को दाखिल हुआ था मंदिर होने का दावा

हिंदू पक्ष ने 19 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर बताते हुए चंदौसी की सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन शाम को मस्जिद का पहले चरण का सर्वे किया गया। इसके बाद 24 नवंबर 2024 को दूसरे चरण का सर्वे हुआ। इस दौरान मौके पर बड़ी संख्या में लोग जुट गए थे।

सर्वे के दौरान भीड़ और पुलिस के बीच विवाद के बाद हिंसा भड़क गई थी। पुलिस के मुताबिक, भीड़ की ओर से पथराव और फायरिंग की गई थी। हिंसा में पांच लोगों की मौत हुई थी। तत्कालीन एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, एएसपी अनुज चौधरी, डिप्टी कलेक्टर समेत 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

24 नवंबर, 2024 को संभल में मस्जिद के सर्वे को लेकर हिंसा हुई थी।

24 नवंबर, 2024 को संभल में मस्जिद के सर्वे को लेकर हिंसा हुई थी।

2750 से ज्यादा लोगों पर दर्ज हुआ था केस

हिंसा के बाद संभल कोतवाली और नखासा थाने में कुल 12 FIR दर्ज की गई थीं। इनमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल समेत कई लोगों को नामजद किया गया था।

पुलिस के मुताबिक, 2,750 से अधिक लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए थे। हालांकि, साक्ष्यों के आधार पर दाखिल चार्जशीट में विधायक के बेटे सुहैल इकबाल का नाम शामिल नहीं किया गया।

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