स्वर्ण जयंती चौक, कचहरी तिराहा का नाम बदलने पर सवाल:नगरवासी बोले- पहले सड़क-पानी-नाली जैसी मूलभूत सुविधाएं दें


सोनभद्र के व्यस्ततम स्वर्ण जयंती चौक (बढ़ौली चौक) का नाम बदलकर अटल चौक करने के प्रस्ताव पर नगरवासियों में चर्चा तेज हो गई है। कचहरी तिराहा का नाम बदलने की कवायद को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। नगरवासियों का कहना है कि नाम बदलने से शहर की तस्वीर नहीं बदलेगी, बल्कि मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना रहेगा। स्थानीय निवासियों के अनुसार, जनपद मुख्यालय होने के बावजूद शहर कई बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा है। बारिश में जल निकासी की गंभीर समस्या होती है, सड़कें जर्जर हैं और पार्किंग की उचित व्यवस्था न होने से प्रमुख चौराहों व बाजारों में अक्सर जाम लगता है। शहर में बेहतर पार्क और सुव्यवस्थित यातायात प्रणाली की भी लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही है। नगरवासियों ने मांग की है कि नाम बदलने से पहले शहर की व्यवस्थाओं में सुधार किया जाए। उनका तर्क है कि चौक और तिराहों के नाम बदलना वास्तविक विकास नहीं है। नामकरण पर खर्च होने वाले धन का उपयोग सड़क, नाली, जल निकासी, पार्किंग और प्रकाश व्यवस्था जैसी जनसुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जाना चाहिए, जिससे नागरिकों को सीधा लाभ मिल सके।
नगरवासियो का कहना है कि जब शहर की गलियों और मुख्य मार्गों पर जल निकासी की समस्या बनी हुई है, सड़कें बदहाल हैं और वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग नहीं है, तो ऐसे में नाम बदलने को प्राथमिकता क्यों दी जा रही है। उनका कहना है कि पहले शहर की मूलभूत जरूरतें पूरी हों, उसके बाद नामकरण किया जाए तो उसका स्वागत भी होगा। सोनभद्र नगरवासियों के मुताबिक आजादी के दशकों बाद भी जिला मुख्यालय की तस्वीर में अपेक्षित बदलाव नहीं आ सका है। शहर के प्रमुख मार्गों पर व्यवस्थित डिवाइडर, पार्किंग, बेहतर यातायात प्रबंधन और जल निकासी जैसी व्यवस्थाएं अभी भी लोगों की मांग बनी हुई हैं। ऐसे में प्रशासन और नगर पालिका को यह तय करना होगा कि जनता के पैसे का इस्तेमाल किस काम को प्राथमिकता देकर किया जाए।लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि चौक और तिराहों के नाम बदलने से पहले नगर की मूलभूत समस्याओं का स्थायी समाधान कराया जाए।

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