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गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सूचना प्रौद्योगिकी एवं कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय IEEE इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन इंटेलिजेंट एंड स्मार्ट कंप्यूटिंग (iSmartComp-2026) का रविवार को समापन हो गया।
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सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्मार्ट कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी प्रबंधन जैसी तकनीकों पर चर्चा की।
एआई का इस्तेमाल मानव क्षमता बढ़ाने के लिए हो
समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि और एमएमयूटी के पूर्व छात्र एर. रोहित कमल सक्सेना ने कहा कि एआई को मानव की प्रतिभा और क्षमता को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीक का सही दिशा में उपयोग करने, लगातार सीखने और नए अवसरों का लाभ उठाने की अपील की।
एआई के साथ मौलिक सोच भी जरूरी
मुख्य अतिथि प्रो. गोपाल टीके कृष्णा ने मानव बुद्धिमत्ता के विकास से लेकर आधुनिक एआई तक की यात्रा पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच विद्यार्थियों को अपनी मौलिक सोच, रचनात्मकता और बुनियादी गणितीय-तार्किक क्षमता मजबूत रखनी चाहिए।
उन्होंने एआई के पर्यावरणीय प्रभाव और डेटा सेंटरों में ऊर्जा व पानी की खपत पर भी चिंता जताई।
सम्मेलन का समापन सीखने का अवसर
एबीवी-IIITM ग्वालियर के निदेशक प्रो. एसएन सिंह ने कहा कि सम्मेलन का समापन केवल कार्यक्रम का अंत नहीं है, बल्कि यहां मिली सीख को आगे उपयोग में लाने का अवसर है। उन्होंने समय प्रबंधन, पारदर्शिता और टीमवर्क को सफलता के लिए जरूरी बताया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी क्षमता पहचानकर मेहनत और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
तकनीक तभी अपनाएं जब बदलाव ला सके
कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने कहा कि तकनीक को केवल नया होने के कारण नहीं, बल्कि समाज और व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता के कारण अपनाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सम्मेलन से शोधकर्ताओं के बीच नए सहयोग और प्रोजेक्ट शुरू होंगे।
1369 शोधपत्रों में से 225 चयनित
सम्मेलन के कन्वेनर प्रो. शिव प्रकाश ने बताया कि iSmartComp-2026 के लिए 1369 शोधपत्र प्राप्त हुए, जिनमें कठोर समीक्षा के बाद 225 शोधपत्रों का चयन किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य शोध, नवाचार, अंतर्विषयक सहयोग और उद्योग-अकादमिक क्षेत्र के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना था।
आयोजन समिति और विद्यार्थियों की सराहना
जनरल चेयर एवं आईटीसीए विभागाध्यक्ष प्रो. डीएस सिंह ने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए कुलपति, प्रो. एसएन सिंह और आयोजन समिति के सदस्यों का आभार जताया। समापन समारोह में आयोजन समिति, शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के योगदान की भी सराहना की गई। अतिथियों को गोरखपुर की प्रसिद्ध टेराकोटा कला भेंट की गई।