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कानपुर नगर निगम में जांच के बाद दिन प्रतिदिन नए भ्रष्टाचार का खुलासा हो रहा है। आपको जानकर हैरत होगी कि कानपुर के विकास के लिए नगर निगम में आए 15वें वित्त आयोग के 594 करोड़ के बजट में जमकर बंदरबांट हुई है। महापौर ने अपने नजदीकी पार्षदों को रेवड़ी की तरह करोड़ों का काम देकर उन्हें फर्श से अर्श पर पहुंचा दिया। चहेते पार्षद रातों-रात लखपति और करोड़पति हो गए। जबकि महापौर का विरोध करने वाले भाजपा के पार्षदों को उनके वार्ड में विकास के लिए एक रुपया भी नहीं दिया गया। भाजपा के इन पार्षदों को जिताने वाली जनता भी ठगा सा महसूस कर रही है। अब 15वें वित्त के बजट से प्रस्तावित विकास कार्य भी जांच के दायरे में है। “दैनिक भास्कर” ने 15वें वित्त में आए बजट की सूची का एनालिसिस किया तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। मेयर के नजदीकी और उनके बेटे अमित पांडेय उर्फ बंटी भइया की पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों के वार्ड में करोड़ों का काम दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के जोन में ज्यादा बजट दिया गया। पढ़ें दैनिक भास्कर की पड़ताल करती हुई खास रिपोर्ट…। टॉप-10 में जोन-2 के पार्षदों को मिला सबसे ज्यादा बजट कानपुर नगर निगम में 15वें वित्त आयोग से सबसे ज्यादा बजट वाले टॉप-10 वार्डों में अकेले जोन-2 के कई वार्ड शामिल हैं। वार्ड-62 के पार्षद भवानी शंकर राय के लिए सबसे अधिक 14.41 करोड़ रुपए प्रस्तावित किए गए हैं। सबसे ज्यादा बजट इसी जोन के पार्षदों को मिला है। जोन-2 यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के विधानसभा क्षेत्र में आता है। सूत्रों के मुताबिक, यही वजह मानी जा रही है कि यहां के पार्षदों को बड़े पैमाने पर बजट मिला है। बागी पार्षदों के वार्डों में प्रस्तावित बजट शून्य कानपुर नगर निगम में प्रस्तावित विकास कार्यों के बजट में छह जोन के आंकड़ों में सबसे कम प्रस्तावित राशि वाले टॉप-10 वार्डों में चार वार्ड ऐसे हैं, जिनके लिए एक भी रुपया प्रस्तावित नहीं किया गया है। बागी पार्षद वार्ड-38 के हरि स्वरूप तिवारी, वार्ड-4 के अंकित मौर्य और वार्ड 10 की पार्षद लक्ष्मी कोरी के वार्ड का बजट शून्य है। इसके बाद वार्ड-5 के आलोक पांडे को 12.13 लाख रुपए प्रस्तावित हैं। जो कि उनका कहना है कि यह बजट सांसद रमेश अवस्थी के द्वारा प्रस्तावित कराया गया था, जबकि बागी पार्षद पवन गुप्ता को 50 लाख की प्रस्तावित राशि आवंटित दिखाई गई है, लेकिन उनका कहना है कि जलकल विभाग के जीएम ने अपने कार्यालय से आवास जाने के लिए सड़क बनवाई है, जिसकी रकम उनके बजट में जोड़ दी गई है। जोन-1 पार्षद हाजी सुहेल को 3.57 करोड़ बजट जोन-1 में जहां वार्ड-32 के पार्षद आकर्ष बाजपेयी को 5.91 करोड़ रुपये तो वहीं वार्ड- 109 के कांगेस पार्षद हाजी सुहेल अहमद को 3.57 करोड़ का बजट मिला, जबकि पार्षद सैय्यद अनवर अली के वार्ड- 94 का बजट शून्य है। जोन-2 में महाना के क्षेत्र के पार्षदों पर मेहरबानी कानपुर नगर निगम में 15वें वित्त आयोग के तहत प्रस्तावित विकास कार्यों की राशि में जोन-2 बाकी पांच जोन पर भारी पड़ रहा है। इस जोन में विकास कार्यों के लिए प्रस्तावित रकम कई गुना अधिक है। नगर निगम सूत्रों के मुताबिक, जोन-2 यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के विधानसभा क्षेत्र में भी आता है। यही वजह मानी जा रही है कि यहां के पार्षदों पर बजट की जमकर कृपा बरसी। खास बात यह है कि अन्य जोन के कई वार्डों में विकास कार्यों के लिए कम राशि प्रस्तावित है, जबकि जोन-2 के वार्डों को बड़े पैमाने पर बजट मिला है। जोन-3 में बजट आवंटन के आंकड़ों ने बढ़ाई सियासी हलचल जोन-3 में प्रस्तावित विकास बजट को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं। आंकड़ों में वार्ड-88 की पार्षद कंचन शुक्ला के लिए सबसे ज्यादा 8.50 करोड़ रुपए प्रस्तावित हैं। दूसरी ओर वार्ड-38 के पार्षद हरि स्वरूप तिवारी के लिए बजट शून्य है। वार्डों के बीच राशि में इतना बड़े अंतर और निगम में बजट तय करने की प्रक्रिया को लेकर बागी पार्षद हरि स्वरुप पिछले 9 महीनों से महापौर प्रमिला पांडेय से सवाल पूछ रहे हैं। जोन-4 में पार्षद सौरभ देव के सामने बागी पार्षद ‘शून्य’ जोन-4 में वार्ड-15 के पार्षद सौरभ देव के लिए सबसे ज्यादा 6.96 करोड़ रुपए प्रस्तावित हैं। इसके बाद वार्ड-42 के जीतेंद्र बाजपेयी को 6.21 करोड़ रुपए प्रस्तावित किए गए हैं। दूसरी ओर वार्ड-4 के पार्षद अंकित मौर्य और वार्ड-10 की बागी पार्षद लक्ष्मी कोरी का बजट शून्य है। जोन- 4 के वार्ड- 37 के बागी पार्षद पवन गुप्ता ने दावा किया कि 15वें वित्त आयोग के तहत उन्हें एक भी रुपया प्रस्तावित नहीं किया गया है। यह अंतर निगम की बजट प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है। जोन-5 में किसी वार्ड को 9.45 करोड़ तो किसी को 32 लाख कानपुर नगर निगम के जोन-5 में प्रस्तावित विकास बजट ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ा दी है। वार्ड-34 के पार्षद नीरज गुप्ता के लिए सबसे ज्यादा 9.45 करोड़ रुपए प्रस्तावित हैं। वार्ड-93 के पार्षद दल के नेता नवीन पंडित को 5.70 करोड़ रुपए प्रस्तावित हैं। दूसरी ओर वार्ड-50 की अनुप्रिया दुबे के लिए महज 32 लाख रुपए प्रस्तावित हैं। जोन-6 में बजट आवंटन पर सियासी सवाल जोन-6 में के वार्ड-44 की पार्षद कुंती के लिए सबसे ज्यादा 7.01 करोड़ रुपए प्रस्तावित हैं। जबकि 5 बार जीतकर आने वाले वार्ड-40 के बीजेपी पार्षद महेंद्र पांडे को 52.50 लाख रुपए प्रस्तावित हैं। बजट में यह बड़ा अंतर नगर निगम की प्राथमिकताओं और वार्डवार राजनीतिक प्रभाव को लेकर सवाल खड़े करता है। 15वें वित्त आयोग में यह लोग होते हैं सदस्य 15वें वित्त आयोग की अध्यक्ष महापौर प्रमिला पांडेय, सचिव/संयोजक नगर आयुक्त, सदस्य जिलाधिकारी, सदस्य केडीए उपाध्यक्ष और पीडब्ल्यूडी के अधिक्षण अभियंता भी सदस्य होते हैं। नगर निगम का भ्रष्टाचार खुल रहा है: विकास जायसवाल वार्ड-79 के भाजपा पार्षद विकास जायसवाल ने नगर निगम में 15वें वित्त आयोग के बजट और टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तीन साल में उनके वार्ड में विकास कार्यों के लिए एक पैसे का बजट नहीं दिया गया। इसके बावजूद रिकॉर्ड में 70 लाख रुपए का बजट उनके वार्ड के लिए दर्शाया जा रहा है। विकास जायसवाल का कहना है कि यह राशि उनके प्रस्ताव पर स्वीकृत नहीं हुई थी और जिस 70 लाख रुपए के काम का उल्लेख किया जा रहा है, उसका टेंडर भी हाल में निरस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि 27 दिसंबर से नगर निगम में भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी है। टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ियों का खुलासा होने के बाद इसे भटकाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि शहर में सड़कें टूटी हैं, जगह-जगह गड्ढे हैं और जलभराव की समस्या बनी हुई है। उनका आरोप है कि नगर निगम में भ्रष्टाचार का ऐसा दौर पहले कभी नहीं देखा गया। बागी पार्षद हरि स्वरुप ने महापौर पर लगाए गंभीर आरोप वार्ड-38 के भाजपा पार्षद और बागी तेवर अपनाने वाले हरि स्वरूप तिवारी ने 15वें वित्त आयोग के बजट को लेकर महापौर प्रमिला पांडेय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनके वार्ड को 15वें वित्त के तहत अब तक एक भी पैसा नहीं मिला है। क्षेत्र के विकास के लिए कई बार महापौर से बजट की मांग की, लेकिन उनकी मांग पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। हरि स्वरूप का आरोप है कि जब भी उन्होंने विकास कार्यों के लिए बजट मांगा, महापौर के बेटे अमित पांडेय उर्फ बंटी ने अपने चहेते लोगों के क्षेत्रों में करोड़ों रुपए के काम कराए। उन्होंने कहा कि वार्ड की जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान है, लेकिन बजट नहीं मिलने के कारण पार्षद भी जनता को जवाब नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम के अधिकारी और ठेकेदार भ्रष्टाचार में शामिल हैं। आरोप लगाया कि संविदा कर्मचारियों की भर्ती में भी बेरोजगार लोगों से लाखों रुपए लिए गए।
महापौर के बेटे पर पार्षदों में भेदभाव करने का आरोप वार्ड-5 के भाजपा पार्षद आलोक पांडेय ने 15वें वित्त आयोग के बजट को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 15वें वित्त का बजट महापौर के अधीन है, लेकिन वर्तमान में इसके कामकाज का नियंत्रण महापौर प्रमिला पांडेय ने अपने बेटे अमित पांडेय को दे रखा है। पार्षद का आरोप है कि इसके बाद बजट आवंटन में मनमानी की जा रही है और पार्षदों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। आलोक पांडेय ने कहा कि नगर निगम में एक तरह का गैंग बनाकर काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में करीब 12 लाख रुपए के विकास कार्य का प्रस्ताव सांसद रमेश अवस्थी की ओर से 15वें वित्त के तहत भेजा गया था, लेकिन उनके अपने प्रस्ताव पर अब तक महापौर ने क्षेत्र के लिए एक भी पैसा स्वीकृत नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ कुछ क्षेत्रों में करोड़ों रुपए के काम दिए जा रहे हैं, वहीं कई पार्षद अपने वार्ड की मूलभूत समस्याओं के लिए बजट का इंतजार कर रहे हैं। ’15वें क्या, 14वें वित्त का भी बजट नहीं मिला’ वार्ड-10 की भाजपा पार्षद लक्ष्मी कोरी ने 14वें और 15वें वित्त आयोग के बजट आवंटन को लेकर नगर निगम पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि पार्षद बनने के बाद से उनके वार्ड को इन दोनों वित्त आयोगों से विकास कार्यों के लिए बजट नहीं मिला। लक्ष्मी कोरी ने बताया कि खलासी लाइन के खटकियाना पार्क में करीब 15 हजार लोग पानी की समस्या से परेशान हैं। क्षेत्र में नलकूप लगाने के लिए नगर विकास मंत्री की ओर से आदेश भी दिए गए थे, लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी काम के लिए बजट नहीं मिला। पार्षद का आरोप है कि नलकूप का काम 15वें वित्त से होना था, लेकिन बजट कुछ खास पार्षदों के क्षेत्रों में ही बांटा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 15वें वित्त में चुनिंदा क्षेत्रों में एक ही काम को कई बार कराकर गोलमाल किया गया। लक्ष्मी कोरी का कहना है कि बजट के वितरण का सीधा असर जनता के विकास और मूलभूत सुविधाओं पर पड़ रहा है। जीएम जलकल ने निजी स्वार्थ के लिए बनवा दी सड़क- पवन गुप्ता 15वें वित्त आयोग के बजट के इस्तेमाल को लेकर वार्ड-37 के भाजपा पार्षद पवन गुप्ता ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि 15वें वित्त के तहत पार्षदों के प्रस्तावों को प्राथमिकता नहीं दी जाती थी। पवन गुप्ता ने कहा कि उनके क्षेत्र में जलकल का कार्यालय होने का फायदा उठाते हुए जीएम जलकल ने 50 लाख रुपए से कार्यालय से सरकारी आवास तक जाने वाली सड़क बनवा दी। यह सड़क आम जनता की सुविधा के बजाय अधिकारी के निजी स्वार्थ को ध्यान में रखकर बनवाई गई। उनका कहना है कि अगर यही 50 लाख रुपए ऐसी सड़क पर खर्च किए जाते, जहां से आम लोग रोजाना गुजरते हैं, तो क्षेत्र की जनता की बड़ी समस्या दूर हो सकती थी। पवन गुप्ता ने कहा कि उनके समेत कई पार्षदों के वार्ड में विकास कार्यों के लिए बजट नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि महापौर के बेटे अमित पांडेय के आदेश पर ही नगर निगम के अधिकारी काम कर रहे हैं। करीब 594 करोड़ के टेंडर भी जांच में फंस गए नगर निगम के सभी 6 जोन के वार्डों में सड़क, नाला समेत अलग-अलग विकास कार्यों के लिए दो साल में करीब 594.10 करोड़ रुपए है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद 15वें वित्त आयोग के मद से जारी किए गए करीब 594 करोड़ के टेंडर भी जांच में फंस गए हैं। इस टेंडरों के लिए तैयार हुए प्रस्तावों के साथ ही स्वीकृती और बाद में हुए निर्माण कार्यों की जांच भी नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने शुरू करा दी है।
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15वें वित्त के 594 करोड़ बजट में जमकर हुआ खेल:महापौर के चहेते पार्षदों को मिला करोड़ों का बजट, बागी पार्षदों की झोली खाली