![]()
अमेठी इंदिरा गांधी स्कूल एंड कॉलेज ऑफ नर्सिंग की छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। वह अपनी मां से फोन पर बात कर रही थी। छोटी बहन को भाई को राखी बांधने और नेग में मिले पैसे संभालकर रखने को कहा था। उसने मां से कहा था कि वह आकर वे पैसे लेगी। लेकिन करीब तीन घंटे बाद परिवार को फोन आया कि बेटी की हालत गंभीर है। परिजन कॉलेज पहुंचते, इससे पहले उन्हें थाने बुला लिया गया। जब वे दोपहर करीब 2:30 बजे कॉलेज पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि दीप्ति ने फांसी लगा ली है और पुलिस शव लेकर जा चुकी है। परिवार का आरोप है कि जिस कमरे में आत्महत्या की बात कही जा रही है, उसका दरवाजा, सिटकिनी या लॉक टूटा नहीं था। इसी को आधार बनाकर परिजन मौत को संदिग्ध बता रहे हैं। मामले में काफी दबाव के बाद मुंशीगंज पुलिस ने कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. रमेश एस. और वार्डन नेहा शुक्ला के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है। 28 अगस्त की सुबह दीप्ति ने अपनी मां से फोन पर बात की थी। परिवार के मुताबिक सुबह करीब 10 बजे हुई इस बातचीत में घर का माहौल बिल्कुल सामान्य था। रक्षाबंधन होने के कारण दीप्ति ने अपनी छोटी बहन सिंपल से भाई समर को राखी बंधवाने की बात कही। दीप्ति ने बहन से कहा था कि राखी के नेग में जो पैसे मिलें, उन्हें संभालकर रखना। वह घर आएगी तो पैसे लेगी। मां को भी बेटी की बातों से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि वह किसी परेशानी में है। परिवार के लिए यही बातचीत अब आखिरी याद बन गई है। इसके कुछ ही घंटे बाद कॉलेज से आया फोन उनकी जिंदगी बदल गया। 1:06 बजे वार्डन के नंबर से आया था फोन परिजनों के मुताबिक दोपहर करीब 1:06 बजे वार्डन नेहा शुक्ला के मोबाइल नंबर से फोन आया। दूसरी तरफ से कहा गया कि दीप्ति की हालत गंभीर है और वे जल्द से जल्द कॉलेज पहुंचें। बेटी के गंभीर होने की खबर सुनते ही माता-पिता कॉलेज के लिए रवाना हो गए। परिवार के मुताबिक रास्ते में दोपहर करीब 1:29 बजे दोबारा फोन आया। इस बार उन्हें सीधे मुंशीगंज थाने पहुंचने के लिए कहा गया। परिजन जब दोपहर करीब 2:30 बजे कॉलेज पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि दीप्ति ने फांसी लगा ली है। परिवार का कहना है कि पुलिस शव को पहले ही कब्जे में लेकर जा चुकी थी। इस घटनाक्रम को लेकर परिजन सवाल उठा रहे हैं कि जब बेटी की हालत गंभीर बताकर उन्हें बुलाया गया था, तो रास्ते में उन्हें सीधे थाने क्यों बुलाया गया और कॉलेज पहुंचने तक शव पुलिस के पास कैसे पहुंच गया? ‘दरवाजा न टूटा, न लॉक-सिटकिनी खराब दीप्ति के परिजनों ने सबसे बड़ा सवाल उस कमरे को लेकर उठाया है, जहां उसके फांसी लगाने की बात बताई गई। उनका आरोप है कि कमरे का दरवाजा, सिटकिनी या लॉक टूटा हुआ नहीं था। परिजनों का कहना है कि अगर कमरे के अंदर से फांसी लगाई गई थी तो दरवाजा कैसे खोला गया और किस परिस्थिति में शव बाहर निकाला गया, इसकी स्पष्ट जानकारी उन्हें नहीं दी गई। परिवार ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायतकर्ता सुनीता यादव और उनके पति कुंवरबख्श यादव दोनों दिव्यांग हैं। परिवार का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन ने बिना उन्हें शव दिखाए पुलिस को सौंप दिया। उन्होंने हॉस्टल और कॉलेज परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सुरक्षित कराने और जांच में शामिल करने की मांग की है। परिजनों ने प्रिंसिपल और वार्डन पर बेटी की हत्या करने तथा साक्ष्य मिटाने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
दबाव के बाद प्रिंसिपल-वार्डन पर हत्या का केस, शनिवार को गांव में अंतिम संस्कार मामले में परिजनों की शिकायत और लगातार दबाव के बाद मुंशीगंज पुलिस ने कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. रमेश एस. और वार्डन नेहा शुक्ला के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। अब पुलिस की जांच में यह सामने आना बाकी है कि दीप्ति की मौत किन परिस्थितियों में हुई और घटनास्थल पर उस समय कौन-कौन मौजूद था। परिवार सीसीटीवी फुटेज, हॉस्टल की गतिविधियों और कमरे से जुड़े साक्ष्यों की जांच की मांग कर रहा है। मौत की असली वजह पोस्टमार्टम और पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। दीप्ति GNM तृतीय वर्ष की छात्रा थी। उसके चचेरे भाई विनय प्रसाद ने बताया कि उसके चाचा-चाची दोनों दिव्यांग हैं। परिवार ने मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद दीप्ति को पढ़ाया था। उसकी छोटी बहन सिंपल यादव और 14 वर्षीय छोटा भाई समर है। रक्षाबंधन के दिन जिस बहन ने भाई की कलाई पर राखी बांधने की बात कही थी, उसी दिन उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया। सुल्तानपुर के बल्दीराय स्थित पैतृक गांव में शनिवार शाम दीप्ति का अंतिम संस्कार कर दिया गया। अब परिवार को जांच से अपनी बेटी की मौत की सच्चाई सामने आने का इंतजार है।
Source link
अमेठी की छात्रा के शव का हुआ अंतिम संस्कार:मौत से पहले फोन पर मां से बोली- छोटी बहन से भाई को राखी बंधवाकर नेग रख लेना