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नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही के बाद सिद्धार्थनगर जिले में नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। हालांकि, राहत की बात यह है कि जिले की सभी प्रमुख नदियां फिलहाल खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ के संभावित असर को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर की 29 अगस्त की दैनिक गेज रिपोर्ट के अनुसार, जिले की प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे दर्ज किया गया है। बानगंगा बैराज पर जलस्तर 93.40 मीटर रहा। रिपोर्ट में खतरे का स्तर 92.42 मीटर दर्शाया गया है, जिससे यह 0.98 मीटर ऊपर प्रतीत होता है। हालांकि, उपलब्ध गेज तालिका में खतरे के जलस्तर में भिन्नता -4.22 मीटर दर्ज है, जिसके कारण आंकड़ों की व्याख्या सावधानी से की जानी चाहिए। राप्ती नदी के बांसी बोसी पुल पर जलस्तर 82.02 मीटर दर्ज किया गया, जबकि इसका खतरे का स्तर 84.90 मीटर है। परसोहन घाट पर राप्ती का जलस्तर 89.81 मीटर पर स्थिर रहा। इसी तरह, बूढ़ी राप्ती के मुंहचोरवा घाट पर जलस्तर 87.02 मीटर, ककरही पुल पर 81.63 मीटर और आलमनगर में 83.60 मीटर मापा गया। इन सभी स्थानों पर जलस्तर खतरे के स्तर से नीचे है। कूड़ा नदी के उसका रेलवे पुल पर जलस्तर 78.23 मीटर, घोघी नदी के लोटन पुल पर 83.25 मीटर, तेलार नाला के सड्डा नाला पर 82.50 मीटर और जमुआर नाला के नौगढ़ पुल पर 81.23 मीटर दर्ज किया गया। जमुआर नाला पर जलस्तर स्थिर बना हुआ है, जबकि अन्य कई स्थानों पर उतार-चढ़ाव देखा गया। नेपाल में बाढ़ से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, वहां बाढ़ से मरने वालों की संख्या 600 के पार पहुंच गई है और बड़े पैमाने पर राहत-बचाव अभियान जारी है। कई इलाकों में मलबा, टूटी सड़कें और बह चुके पुल राहत कार्यों में बाधा डाल रहे हैं। फिलहाल सिद्धार्थनगर में नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन नेपाल की तबाही और सीमावर्ती इलाकों में बदलते जलप्रवाह को देखते हुए निगरानी बेहद अहम है। ड्रेनेज खंड और बाढ़ नियंत्रण कक्ष की ओर से जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है।
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सिद्धार्थनगर में प्रमुख नदियां खतरे के निशान से नीचे:नेपाल में बाढ़ के बाद भी जलस्तर पर लगातार निगरानी