लखनऊ में 139 साल पुराना दंगल:200 पहलवानों ने लिया हिस्सा , विजेता को मिलेंगे ₹51 हजार नकद


लखनऊ में रक्षाबंधन पर 139 साल से दंगल हो रहा है। इस दो दिवसीय आयोजन में देशभर के पहलवान जोर-अजमाइश करने आते हैं। कैंट स्थित हरिशचंद्र इंटर कॉलेज के ग्राउंड में अखाड़ा बनाया जाता है। अखिल भारतीय मस्ता पहलवान गुरुजी श्रीरामचंद्र स्मारक इसका आयोजन करा रहा है। यहां के दंगल में लड़ने वाले पहलवान नेशनल लेवल के गेम्स तक अपनी बाजुओं का दम दिखाने पहुंचे। आयोजकों का कहना है कि संसाधनों का अभाव है, अन्यथा आज भी यहां से टैलेंट निकलें। रक्षाबंधन के दिन शाम 6:00 बजे शुरू हुई कुश्ती रात्रि 8:00 बजे तक चली। पहले दिन यूपी के अलग अलग हिस्सों से पहलवानों ने अपने प्रतिद्वंद्वी को पटखनी दिया। दो दिनों तो चलने वाली कुश्ती में विजेता को को 51 हजार रुपए नकद इनाम दिया जाएगा। कई राज्यों के पहलवान हुए शामिल दंगल प्रबंधक विकास चंद्र यादव ने बताया कि इस दंगल में 200 पहलवान जोर अजमाइश कर रहे हैं । इसमें यूपी के विभिन्न जनपदों के साथ अलावा दिल्ली के गुरु हनुमान अखाड़ा और छत्रसाल स्टेडियम के कुश्ती प्रशिक्षु, हरियाणा के मनका अखाड़ा और पंजाब के दुष्यंत अखाड़े के पहलवानों दो-दो हाथ करने आए हैं। विकास यादव ने बताया कि हर वर्ष रक्षाबंधन पर्व पर इसका आयोजन होता है। तमाम पहलवानों को इस कुश्ती का शिद्दत से इंतजार रहता है। ‘मेडल आने से खिलाड़ियों को मिलता है हौसला’ दंगल में आए 71 वर्षीय सियाराम ने बताया कि 1984 से लगातार इसमें शामिल हो रहे हैं। 20 सालों तक लगातार इसी मैदान में उन्होंने दंगल लड़ा। कुश्ती का खेल आगे बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल आने के बाद खिलाड़ियों में और अधिक जोश बढ़ता है। यह हिंदुस्तान का पारंपरिक खेल है जिसे और बढ़ावा देने की जरूरत है। जब अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में मेडल आता है तो इससे खिलाड़ियों का हौसला बढ़ता है और देश को एक नई पहचान मिलती है।

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