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लखनऊ के गोमती नगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान परिसर में गुरुवार को हास्य नाटक हाय हैंडसम का मंचन किया गया । संस्कृति निदेशालय, उत्तर प्रदेश के सहयोग से रासरंग सांस्कृतिक शैक्षिक सामाजिक संस्था की ओर से कलाकारों ने हास्य के साथ परिवार और बुजुर्गों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को भी सामने रखा। नाटक की कहानी कर्नल कपूर के इर्द-गिर्द घूमती है। पत्नी के निधन के बाद कर्नल कपूर अकेलेपन से परेशान हैं। उनका बेटा स्वामी पूजा-पाठ में व्यस्त रहता है, जबकि बहू मंदाकिनी मॉडलिंग की दुनिया में व्यस्त है। घर का नौकर कमाल भी अक्सर छुट्टी पर रहता है। ऐसे में कर्नल कपूर की जिंदगी में स्वामी की सास सीता देवी की एंट्री होती है। दोनों के बीच बातचीत बढ़ती है और धीरे-धीरे एक-दूसरे का सहारा बन जाते हैं। बिना बताए कर ली शादी नजदीकियां बढ़ने के बाद कर्नल कपूर और सीता देवी बिना किसी को बताए शादी कर लेते हैं। जब दोनों शादी करके घर लौटते हैं तो बेटा और बहू उनके फैसले से हैरान हो जाते हैं और नाराजगी जताते हैं। इस पर कर्नल कपूर उन्हें घर छोड़कर चले जाने के लिए कह देते हैं। कुछ देर तक चले तनाव के बाद स्वामी और मंदाकिनी को अपनी गलती का एहसास होता है। उन्हें समझ आता है कि बुजुर्गों के लिए अकेलापन कितना पीड़ादायक हो सकता है और इस उम्र में उन्हें दवा-पैसे से ज्यादा अपनापन, बातचीत और साथ की जरूरत होती है। कलाकारों ने निभाई भूमिकाएं कर्नल कपूर की भूमिका धीरेंद्र कुमार पांडेय ने, स्वामी की पर्व खुराना और मंदाकिनी की अरोही गुप्ता ने निभाई। सीता देवी के किरदार में सरिता यादव और कमाल व महात्मा की भूमिका में आकाश नजर आए। दारू वाले का किरदार केशव अग्रवाल ने निभाया। नाटक के लेखक जयवर्धन सिंह हैं। परिकल्पना और निर्देशन सरिता यादव ने किया।
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लखनऊ में हास्य नाटक 'हाय हैंडसम' का मंचन:परिवार और बुजुर्गों के संवेदनशील मुद्दे उठाए, अकेला दामाद सास के करीब आया