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वाराणसी में मंगलवार को 24 घंटे में 124 मिमी बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। BHU के सर सुंदरलाल अस्पताल परिसर और गेट पर 3 फीट तक पानी भर गया। 300 से 400 किलोमीटर दूर से इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे परिवारों के सामने BHU गेट ही सबसे बड़ी बाधा बन गया। कोई मरीज को सहारा देकर पानी पार कर रहा था तो कोई अपनी गाड़ी बंद होने के बाद बेबस खड़ा था। कई परिवारों ने कमर तक भरे पानी को देखकर अस्पताल के गेट से ही लौट जाना बेहतर समझा। सबसे ज्यादा मार्मिक तस्वीर उन परिजनों की रही, जो गोद में नवजात बच्चों को लेकर पानी के बीच से डॉक्टर तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। दो महीने के बच्चे से लेकर स्ट्रेचर पर गंभीर मरीजों तक, हर किसी को इलाज से पहले पानी में घुसकर जाना पड़ा। मां-बाप की आंखों में बस एक ही चिंता थी कि किसी तरह बच्चे को सुरक्षित अस्पताल पहुंचा दें। लेकिन, सवाल ये है कि इलाज के लिए दूर-दराज से आने वाले मरीजों और मासूम बच्चों को हर बारिश में ऐसी मुश्किलों से आखिर कब राहत मिलेगी? मरीजों और परिजनों से दैनिक भास्कर ने बात की, पढ़िए उन्होंने क्या कहा… शाहबाज बोले- पत्नी एडमिट हैं, गाड़ी पानी में खराब हो गई मंगलवार सुबह करीब 11 बजे की बात है, BHU के सिंह द्वार पर करीब 3 फीट पानी भरा था। आने-जाने वाले लोगों की गाड़ियां पानी में बंद हो रही थीं। कुछ लोग हिम्मत जुटाकर पानी के बीच से अस्पताल जा रहे थे। वहीं, कुछ मरीज गाड़ी से उतरकर पैदल ही अस्पताल के लिए निकल पड़े। सिंह द्वार पर हमारी मुलाकात शाहबाज खान से हुई। उन्होंने बताया, “मेरी पत्नी अस्पताल में भर्ती हैं। हम घर से अस्पताल जा रहे थे, लेकिन गेट पर इतना पानी भर गया है कि मेरी गाड़ी भी बंद हो गई। अब समझ नहीं आ रहा कि पहले गाड़ी ठीक करवाऊं या पत्नी के पास जाऊं। प्रशासन की व्यवस्था बहुत खराब है।” नवजात बच्चे को वार्ड तक ले जाते दिखे परिजन नवजात बच्चे को लेकर जा रहे मुकेश ने कहा, “हम अपने बच्चे को दिखाने के लिए आए थे। उसकी उम्र अभी महज दो महीने है, लेकिन हमें उम्मीद नहीं थी कि अस्पताल के बाहर इतना पानी भरा होगा।” कुछ ऐसी ही तस्वीर BHU ओपीडी के बाहर भी देखने को मिली, जहां तमाम परिजन अपने मरीजों को अस्पताल लेकर जाते दिखाई दिए। इनमें कुछ लोग मरीजों को कंधे पर उठाकर तो कुछ बच्चों को गोद में लेकर पानी के बीच से अस्पताल तक पहुंच रहे थे। सभी के मन में बस यही चिंता थी कि किसी तरह उनके परिजन का इलाज हो जाए। हालांकि, जलभराव और बदहाल व्यवस्था को लेकर मरीजों और तीमारदारों में प्रशासन के प्रति नाराजगी भी साफ दिखाई दे रही थी। मिर्जापुर से आए दिव्यांग आशीष बोले- पानी में गिरने का डर लगा रहा एक पैर से दिव्यांग आशीष मिर्जापुर से इलाज कराने के लिए BHU पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि रात से ही तेज बारिश हो रही थी। सुबह किसी तरह अस्पताल पहुंचे और अब डंडे के सहारे इमरजेंसी वार्ड की ओर जा रहे हैं। आशीष ने कहा, “हम यहां के सांसद से अपील करना चाहते हैं कि वे इस ओर ध्यान दें और अस्पताल परिसर में जलभराव की समस्या को दूर कराने की व्यवस्था करें। यहां आने में काफी परेशानी हो रही है। कई बार ऐसा लगा कि कहीं हम इस पानी में गिर न जाएं।” हर साल जारी होता है करोड़ों का बजट, लेकिन स्थिति वैसी ही हर साल बारिश के मौसम में सर सुंदरलाल अस्पताल की ऐसी ही तस्वीर सामने आती है। यूपी, बिहार, झारखंड समेत आसपास के कई राज्यों से हर दिन करीब 6,000 मरीज इलाज की उम्मीद लेकर यहां पहुंचते हैं। लेकिन, मरीजों की भारी संख्या के मुकाबले अस्पताल की व्यवस्थाएं कई बार काफी बदतर नजर आती हैं। अस्पताल के लिए हर वर्ष करीब 150 करोड़ रुपए का बजट आता है। इसके बावजूद बारिश के दौरान मरीजों और उनके परिजनों को जलभराव के बीच अस्पताल पहुंचने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठता है कि इतने बड़े बजट के बावजूद हर साल बारिश में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पा रहा है? आखिर मरीजों और तीमारदारों को इस परेशानी से कब राहत मिलेगी? 12 घंटे तक अस्पताल कैंपस में भरा रहा पानी BHU अस्पताल कैंपस में करीब 12 घंटे तक जलभराव की स्थिति बनी रही। दिनभर अस्पताल परिसर और सिंह द्वार के आसपास पानी भरा रहा। देर रात नगर निगम की टीम ने सिंहद्वार पर चार पंपसेट लगाकर पानी की निकासी शुरू कराई। हालांकि, इमरजेंसी वार्ड और ओपीडी के पास भी जलभराव की स्थिति बनी रही। इस दौरान BHU प्रशासन का कोई भी आलाधिकारी मौके पर फील्ड में नजर नहीं आया। जलभराव से मरीजों और तीमारदारों को हो रही परेशानी को लेकर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान भी जारी नहीं किया गया। न ही यह स्पष्ट किया गया कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।सवाल है कि हर साल बारिश के दौरान सामने आने वाली इस समस्या से मरीजों और तीमारदारों को आखिर कब राहत मिलेगी?
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BHU अस्पताल में 6 घंटे कमर तक पानी भरा रहा:गोद में बच्चे को लेकर भटकते रहे परिजन, दिव्यांग बोले- पानी में गिरने का डर लगता रहा