जालौन में पंचायत सहायकों ने आंदोलन का किया ऐलान:लखनऊ में 7 सितंबर से अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दी


जालौन में पंचायत सहायक कर्मचारी यूनियन उत्तर प्रदेश ने पंचायत सहायकों के मानदेय में बढ़ोतरी, सेवा स्थायीकरण समेत पांच सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। सोमवार को यूनियन पदाधिकारियों और पंचायत सहायकों ने जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मांगों के शीघ्र समाधान की मांग की। यूनियन ने शासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में सकारात्मक निर्णय नहीं होने पर 7 सितंबर 2026 से लखनऊ के ईको गार्डन में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
यूनियन के प्रतिनिधियों ने बताया कि पंचायत सहायक लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। इससे पहले 1 जून 2026 को मांग पत्र और अल्टीमेटम ज्ञापन दिया गया था। इसके बाद 3 जून को शासन स्तर पर यूनियन के प्रतिनिधिमंडल की वार्ता हुई थी। वार्ता के दौरान प्रमुख सचिव, पंचायती राज विभाग की ओर से पंचायत सहायकों की मांगों के समाधान के लिए दो माह का समय मांगा गया था। यूनियन का आरोप है कि निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद मानदेय बढ़ोतरी, स्थायीकरण और अन्य मांगों को लेकर कोई ठोस एवं सकारात्मक आदेश जारी नहीं किया गया है। इससे प्रदेशभर के पंचायत सहायकों में रोष और असंतोष बढ़ रहा है। ज्ञापन में पंचायत सहायकों का मानदेय बढ़ाकर पंचायत सचिव के समान 30 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने अथवा कम से कम प्रदेश में निर्धारित न्यूनतम मजदूरी के बराबर मानदेय दिए जाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। इसके साथ ही संविदा व्यवस्था समाप्त कर पंचायत सहायकों के लिए स्थायी सेवा नियमावली बनाए जाने तथा उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की गई है।
महिला पंचायत सहायकों के लिए मातृत्व अवकाश की व्यवस्था लागू करने, स्थानांतरण एवं समायोजन के लिए स्पष्ट नीति बनाए जाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। वहीं आगामी विकास अधिकारी/ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती में पंचायत सहायकों के अनुभव को देखते हुए 50 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिए जाने की मांग की गई है। यूनियन ने शासन स्तर पर सदस्य प्रतिनिधियों से मुलाकात कराकर समस्याओं पर सीधी वार्ता कराने की मांग भी रखी है। पंचायत सहायकों का कहना है कि गांवों में सरकार की विभिन्न योजनाओं और पंचायत संबंधी कार्यों को धरातल तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित मानदेय और सेवा सुरक्षा नहीं मिल पा रही है। यूनियन ने कहा कि सरकार यदि एक सप्ताह के भीतर मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो आंदोलन का निर्णय टाला जा सकता है। अन्यथा प्रदेशभर के पंचायत सहायक लखनऊ पहुंचकर अनिश्चितकालीन आंदोलन करने को मजबूर होंगे। यूनियन पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 7 सितंबर से प्रस्तावित प्रदेशव्यापी आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान पंचायत सहायकों ने मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की अपील की।

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