एसएनएमसी में पहली बार हुआ किडनी ट्रांसप्लांट:पत्नी की किडनी से 32 वर्षीय पति को मिला नया जीवन, लखनऊ टीम का मिला सहयोग


एसएन मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया है। यहां पहली बार सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया गया है। क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ित और लंबे समय से डायलिसिस पर चल रहे 32 वर्षीय मरीज को उसकी पत्नी ने अपनी एक किडनी दान कर नया जीवन दिया। एसएनएमसी और पूरे आगरा मंडल के लिए यह बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। सफल प्रत्यारोपण के बाद मरीज के शरीर में लगाई गई नई किडनी ने भी काम करना शुरू कर दिया है। मरीज और किडनी दान करने वाली उसकी पत्नी, दोनों की हालत फिलहाल स्थिर है और दोनों तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। किडनी ट्रांसप्लांट की यह जटिल सर्जरी सुबह 9:30 बजे शुरू हुई और दोपहर 3 बजे तक चली। करीब साढ़े पांच घंटे तक चले ऑपरेशन में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), लखनऊ की विशेषज्ञ टीम और एसएनएमसी की स्थानीय टीम ने संयुक्त रूप से काम किया। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और विभिन्न विभागों की टीमों के समन्वय से आगरा में पहला किडनी प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक पूरा किया गया। मुख्यमंत्री योजना से मिली मदद मरीज का यह जीवनरक्षक प्रत्यारोपण मुख्यमंत्री असाध्य रोग उपचार योजना के तहत मिली वित्तीय सहायता से संभव हो सका। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीज को भी उच्चस्तरीय उपचार मिल पाया। एसएनएमसी के प्रधानाचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने इसे एसएन मेडिकल कॉलेज और पूरे आगरा मंडल के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू होने से गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. अपूर्व जैन ने बताया कि सर्जरी के बाद मरीज और किडनी दानकर्ता दोनों की स्थिति पूरी तरह स्थिर है। दोनों की रिकवरी अच्छी चल रही है और मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित किडनी ने अच्छी तरह से काम करना शुरू कर दिया है। अब नहीं लगाने पड़ेंगे बड़े शहरों के चक्कर एसएनएमसी में इस सुविधा की शुरुआत के बाद आगरा और आसपास के जिलों के मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए दिल्ली, लखनऊ या जयपुर जैसे बड़े शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अब तक मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता था, जिससे इलाज के अलावा यात्रा और रहने का अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता था। स्थानीय स्तर पर सुविधा मिलने से समय और आर्थिक बोझ दोनों कम होने की उम्मीद है। इस सफल प्रत्यारोपण में एसजीपीजीआई लखनऊ के यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, एनेस्थीसिया और नर्सिंग स्टाफ के साथ एसएनएमसी के नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग की विशेषज्ञ टीम शामिल रही। सभी विभागों के संयुक्त प्रयास से एसएनएमसी में यह पहली सफलता हासिल हुई।

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