पछतावा अतीत को नहीं बदल सकता और चिंता भविष्य को:अयोध्या में स्वामी प्रभंजनानंद शरण बोले- विचलित हुए बिना आगे बढ़े


भगवान श्री राम के पावन जन्मोत्सव की पावन बेला में अयोध्या धाम स्थित सिद्ध पीठ सियाराम किला, झुनकी की घाट में पांच दिवसीय श्रीराम कथा का भव्य एवं भक्तिमय शुभारंभ हुआ। यह दिव्य आयोजन पीठाधीश्वर महंत करुणानिधान शरण महाराज के सान्निध्य व संयोजन में आयोजित हो रहा है। 27 मार्च को मंदिर परिसर में प्रभु के जन्मोत्सव का भव्य उत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा।कथा का शुभारंभ करते हुए डॉ. स्वामी प्रभंजनानंद शरण महाराज ने श्रीराम के आदर्शों का जीवन दायी व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य की वाणी उसके संस्कारों और शिक्षा का दर्पण होती है। परिश्रम, धैर्य और प्रतिष्ठा से संपन्न कर्म कभी व्यक्ति को झुकने नहीं देते, ठीक उसी प्रकार विचारपूर्वक बोले गए शब्द जीवन को गरिमा प्रदान करते हैं। उन्होंने जीवन की विषम परिस्थितियों में भी प्रसन्न रहने की प्रेरणा देते हुए कहा कि सुख और दुख जीवन के अभिन्न अंग हैं, जो दिन-रात की भांति निरंतर प्रवाहित होते रहते हैं। धर्माचरण ही मनुष्य को पशु से श्रेष्ठ बनाता है, अन्यथा आहार, निद्रा और भोग की प्रवृत्तियां दोनों में समान हैं। वर्तमान में जीने का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि पछतावा अतीत को नहीं बदल सकता और चिंता भविष्य को नहीं संवार सकती, अतः वर्तमान का आनंद ही जीवन का सच्चा सुख है।स्वामी जी ने निंदा को जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि लक्ष्य से विचलित हुए बिना आगे बढ़ते रहना चाहिए, क्योंकि सफलता प्राप्त होते ही आलोचकों की वाणी स्वतः परिवर्तित हो जाती है। उन्होंने प्रसन्नता को स्वास्थ्य का मूल बताते हुए कहा कि सकारात्मक ऊर्जा और हर्ष ही मनुष्य की आंतरिक शक्ति को बढ़ाते हैं। सुख जहां अहंकार की परीक्षा लेता है, वहीं दुख धैर्य की कसौटी बनता है।कथा के विश्राम बेला में श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर आरती उतारी और प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में पधारे अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान प्रहलाद शरण द्वारा किया गया। समूचा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से ओतप्रोत रहा।

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