जगद्गुरु राघवाचार्य महाराज ने अयोध्या में बद्रीधाम की महिमा बताई:बोले- बदरीधाम भगवान विष्णु की परम पावन उपासना-भूमि


बद्रीनाथ भगवान के दिव्य प्राकट्योत्सव के पावन अवसर पर श्री रामलला देवस्थानम में आयोजित श्री बद्री विशाल भगवान की दिव्य कथा में जगद्गुरु रामानुजाचार्य डॉ. राघवाचार्य महाराज ने भगवान श्री बद्री नारायण के प्राकट्य एवं पावन नाम ‘बदरीनाथ’ के दिव्य रहस्य का अत्यंत भावपूर्ण और शास्त्रीय विवेचन किया। जगद्गुरु महाराज ने बताया कि सनातन वैदिक परंपरा में भगवान श्री बदरी नारायण केवल एक तीर्थ के अधिष्ठाता देव नहीं, बल्कि तप, भक्ति, ज्ञान और मोक्ष की दिव्य परंपरा के केंद्र हैं। उत्तराखंड की हिमालयी भूमि में स्थित श्री बद्री धाम भगवान विष्णु की परम पावन उपासना-भूमि है। जहां भगवान नारायण नर-नारायण रूप में लोककल्याण के लिए तपस्या करते हैं, ऐसी श्रद्धा पुराणों और वैष्णव परंपरा में वर्णित है। उन्होंने भगवान के ‘बदरीनाथ’ नाम की महिमा बताते हुए कहा कि ‘बदरी’ शब्द बदरी वृक्ष से संबंधित है। वैष्णव परंपरा में भगवान के तप और उनके दिव्य स्वरूप से जुड़ी अनेक कथाएं इस नाम की आध्यात्मिक महत्ता को प्रकट करती हैं। इसी कारण बद्नी वन और बद्री नाथ धाम का स्मरण भक्त के हृदय में भगवान के प्रति श्रद्धा, समर्पण और वैराग्य की भावना को जागृत करता है। जगद्गुरु महाराज ने कहा कि भगवान का नाम केवल संबोधन नहीं होता, बल्कि वह स्वयं भगवान की दिव्य सत्ता और कृपा का स्मरण कराता है। ‘श्री बद्री नारायण’ का नाम श्रद्धापूर्वक लेने से साधक के भीतर भगवान के चरणों में शरणागति का भाव प्रबल होता है। भगवान बद्री विशाल की आराधना हमें यह संदेश देती है कि मनुष्य को सांसारिक जीवन में रहते हुए भी अपने जीवन का अंतिम लक्ष्य भगवान की भक्ति, सेवा और आत्मसमर्पण को बनाना चाहिए। उन्होंने श्री बद्री नारायण भगवान को भारतवर्ष की अधिष्ठात्री वैदिक-वैष्णव परंपरा के प्रमुख आराध्य देवों में से एक बताते हुए कहा कि भारत की तीर्थ परंपरा केवल भौगोलिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति की यात्रा है। बदरीधाम की यात्रा साधक को तप, संयम, श्रद्धा और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण का संदेश देती है। जगद्गुरु महाराज की मुखारविंद से भगवान श्री बद्री विशाल की ऐसी दिव्य कथा सुनकर उपस्थित श्रोतागण भाव-विभोर और आह्लादित हो उठे। कथा के दौरान वातावरण ‘श्री बदरी नारायण भगवान की जय’ और भगवान के पावन नाम-स्मरण से गुंजायमान हो गया। भगवान श्री बद्री नारायण सभी भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखें और उनके जीवन में भक्ति, ज्ञान, शांति तथा सदाचार का प्रकाश प्रकाशित करें—इसी मंगलकामना के साथ कथा का भावपूर्ण समापन हुआ।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *