गुरुद्वारे में बैठे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल व अन्य।
पंजाब से दिल्ली जा रहे 55 किसानों को खनौरी-दाता सिंहवाला बॉर्डर पर हरियाणा पुलिस ने रोक दिया है। इसके बाद किसानों की जींद की DC डॉ वैशाली शर्मा के साथ मीटिंग जारी है। पुलिस ने बॉर्डर पर बैरिकेडिंग, कंटीली तार, कंक्रीट ब्लॉक और कंटेनर लगाकर रास्ता बंद
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किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में 55 किसान रवाना हुए हैं। इससे पहले जत्थे ने 2024 के किसान आंदोलन के दौरान शुभकरण सिंह की मौत वाले स्थान से मिट्टी उठाई।
डल्लेवाल ने कहा- “अब रास्ता किसानों ने नहीं, हरियाणा पुलिस ने रोका है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट को इस पर संज्ञान लेना चाहिए। थोड़ी संख्या में किसान दिल्ली जाकर अपनी बात रखना चाहते हैं। हमारे 5 नेता पुलिस से बात करेंगे। अगर आगे नहीं जाने दिया गया तो आज रात यहीं रुकेंगे।”
किसानों ने कहा कि यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगी। इसका उद्देश्य किसानों से जुड़े मुद्दों के साथ अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील के विरोध की आवाज केंद्र सरकार तक पहुंचाना है।

खनौरी-दाता सिंहवाला बॉर्डर पर लगाए गए कंटीले तार।
29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचने का लक्ष्य किसान नेताओं ने बतााय कि यात्रा में एक किसान मुख्य रूप से पैदल चलेगा, जबकि उसके साथ कुछ किसान रहेंगे, जो उसका सामान उठाएंगे। रास्ते में जगह-जगह पड़ाव होंगे और जत्था चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा।
किसानों का लक्ष्य 29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचने का है। वहां एक दिन की किसान पंचायत आयोजित की जाएगी। इसके बाद सरकार को किसानों की मांगों से संबंधित मांग पत्र सौंपने का प्रयास किया जाएगा।
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में खनौरी-दाता सिंहवाला बॉर्डर से दिल्ली के जंतर-मंतर तक ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ निकालने का ऐलान किया था

खनौरी-दाता सिंहवाला बॉर्डर पर कंक्रीट के बैरिकेड।
जानिए किसान नेता डल्लेवाल ने क्या कहा…
- सरकार को टकराव का कोई मौका नहीं देंगे: किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि किसान किसी तरह के टकराव के पक्ष में नहीं हैं और जत्था शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाएगा। अब यह सरकार पर निर्भर है कि वह वहां किस तरह का माहौल बनाती है।
- जत्थे में सीमित संख्या में किसान: डल्लेवाल ने कहा कि अगर सरकार किसानों को रोकती है तो इससे स्पष्ट होगा कि उसे किसानों की ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से नहीं, बल्कि उनके मुद्दों से परेशानी है। जत्थे में सीमित संख्या में किसान शामिल हैं। न बड़ी भीड़ है और न ही बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां हैं। किसान लगातार सरकार का रवैया देख रहे हैं। कभी अंबाला तो कभी चंडीगढ़ में लोगों पर लाठीचार्ज किया जा रहा है।
- सरकार का चेहरा सामने आएगा: डल्लेवाल ने कहा कि किसानों के धरने लगाने पर सरकार उन्हें बदनाम करती है, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से जा रहे किसानों को रोकना गलत होगा।

पंजाब के किसानों का जत्था, जिसमें शामिल किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल।
SP बोले- धारा 163 लागू, किसानों को आगे नहीं जाने देंगे जींद SP कुलदीप सिंह भी दाता सिंहवाला बॉर्डर पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि आम जनता को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। दिल्ली कूच करने पहुंचे किसानों को बताया जाएगा कि इलाके में धारा 163 लागू है, इसलिए उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सुरक्षा के मद्देनजर जगह-जगह नाके लगाए गए हैं।

कौन थे किसान शुभकरण, जिनकी खनौरी बॉर्डर पर मौत हुई
शुभकरण सिंह पंजाब के बठिंडा जिले के बल्लो गांव के युवा किसान थे और 2020-21 के किसान आंदोलन में भी शामिल हुए थे। फरवरी 2024 में MSP की कानूनी गारंटी समेत अन्य मांगों को लेकर किसानों के दिल्ली कूच के दौरान वह 13 फरवरी को खनौरी बॉर्डर पहुंचे थे। 21 फरवरी को किसानों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव के दौरान शुभकरण गंभीर रूप से घायल हुए और पटियाला के राजिंदरा अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमॉट्रम में उनके सिर में धातु के छर्रे मिले थे। उनकी मौत के बाद किसान संगठनों ने इसे आंदोलन के दौरान हुई मौत बताते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की। 28 फरवरी को पंजाब पुलिस ने उनके पिता की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की और 29 फरवरी को उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया। शुभकरण की मौत के बाद किसान संगठनों ने उन्हें आंदोलन का शहीद माना और खनौरी बॉर्डर पर उनकी याद में शहीदी स्थल बनाया।