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मथुरा में 1857 की क्रांति की वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी की 195वीं जयंती रविवार को मनाई गई। दोपहर करीब 3:30 बजे वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी महिला पार्क में यह समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर देशभर में उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया गया। रानी अवंतीबाई लोधी साहस, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक हैं। मध्य प्रदेश के रामगढ़ राज्य की इस वीरांगना ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंका था। उन्होंने अपने अदम्य साहस से अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने हजारों क्रांतिकारियों और सैनिकों का नेतृत्व किया। अंग्रेजों के सामने झुकने के बजाय उन्होंने अंतिम सांस तक मातृभूमि की रक्षा का संकल्प निभाया। रानी अवंतीबाई लोधी का जन्म 16 अगस्त को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के मनखेड़ी गांव में हुआ था। उनका विवाह रामगढ़ रियासत के राजा विक्रमादित्य सिंह से हुआ था। उन्होंने अपने साहस और नेतृत्व क्षमता से स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जयंती समारोह के दौरान समाज के लोगों ने वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी महिला पार्क में स्थापित भव्य प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित किए। इसके बाद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किए गए। लोगों ने ‘रानी अवंतीबाई लोधी अमर रहें’ के नारे लगाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि रानी अवंतीबाई का जीवन हमें सिखाता है कि राष्ट्र और स्वाभिमान की रक्षा के लिए साहस, त्याग और दृढ़ संकल्प के साथ हर चुनौती का सामना करना चाहिए। उनकी वीरता और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरणा देती रहेगी।
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मथुरा में रानी अवंतीबाई लोधी की 195वीं जयंती मनाई:महिला पार्क में प्रतिमा पर किया माल्यार्पण, लगाए अमर रहें के नारे