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लखनऊ के केजीएमयू के स्त्री रोग कैंसर विभाग की टीम ने 39 साल की अविवाहित महिला के गर्भाशय से करीब 2 किलो के कई बड़े फाइब्रॉइड निकाल दिए। खास बात यह रही कि डॉक्टरों ने पेट पर बड़ा चीरा लगाए बिना सिर्फ तीन छोटे छेद से लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की। डॉ. निशा सिंह के नेतृत्व में हुई सर्जरी में सबसे बड़ा फाइब्रॉइड करीब 20×15 सेंटीमीटर का था। महिला पिछले एक साल से पेट दर्द, भारीपन और लगातार परेशानी से जूझ रही थी। ऑपरेशन के बाद उसकी हालत सामान्य है और उसे अब दर्द से राहत मिल गई है। गर्भाशय में कई बड़े फाइब्रॉइड पाए गए डॉक्टरों के अनुसार जांच में गर्भाशय में कई बड़े फाइब्रॉइड पाए गए। उनका आकार और संख्या दोनों चुनौतीपूर्ण थे। सामान्य परिस्थितियों में इतने बड़े फाइब्रॉइड निकालने के लिए पेट पर बड़ा चीरा लगाकर ओपन सर्जरी करनी पड़ती है। इस मामले में टीम ने अत्याधुनिक मिनिमली इनवेसिव तकनीक का उपयोग किया और पूरी सर्जरी लैप्रोस्कोपिक तरीके से की। सर्जरी के दौरान फाइब्रॉइड को विशेष तकनीक ‘मॉर्सेलेशन’ के जरिए लंबी शीट के रूप में बाहर निकाला गया। निकाले गए फाइब्रॉइड का कुल वजन करीब 2 किलोग्राम था। इससे मरीज को बड़े ऑपरेशन के जोखिम, अधिक रक्तस्राव और लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने जैसी समस्याओं से बचाया जा सका। डॉ. निशा सिंह ने बताया कि बड़े और जटिल फाइब्रॉइड के मामलों में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी करना तकनीकी रूप से कठिन होता है। इसके लिए आधुनिक उपकरण, अनुभवी टीम और धैर्य की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सर्जरी से मरीज को कम दर्द, कम संक्रमण, कम रक्तस्राव और जल्दी स्वस्थ होने का लाभ मिलता है। केजीएमयू के स्त्री रोग कैंसर विभाग की इस उपलब्धि को जटिल स्त्री रोग मामलों में उन्नत लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। यह मामला दिखाता है कि विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीक के सहारे बड़े फाइब्रॉइड का उपचार भी बिना बड़े चीरे के संभव है। इस सर्जरी में डॉ. निशा सिंह के साथ डॉ. चंद्रिमा रे, डॉ. रितु सिंह, डॉ. डिंपल रानी और एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. धर्मराज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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KGMU में बिना बड़ा चीरा लगाए की सर्जरी:2 किलो के फाइब्रॉइड, तीन छोटे छेद से निकाले,39 वर्षीय महिला के गर्भाशय में थे