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कानपुर मेट्रो कॉरिडोर-2 (सीएसए से बर्रा-8) की ट्रेनों के रखरखाव और प्रबंधन के लिए सीएसए यूनिवर्सिटी परिसर में निर्माणाधीन डिपो का काम अब आखिरी चरण में पहुंच गया है। ट्रेनों के रखरखाव के लिए बनने वाला मुख्य वर्कशॉप 99 प्रतिशत तक तैयार हो चुका है। हाल ही में वर्कशॉप की छत के लिए पर्यावरण अनुकूल प्री-इंजीनियर्ड बिल्डिंग (PEB) स्ट्रक्चर लगाने का काम भी पूरा कर लिया गया है। बिना पिलर की छत और प्राकृतिक रोशनी, ऐसे बचेगा खर्च डिपो के इस आधुनिक वर्कशॉप की छत की अपनी कुछ खास खूबियां हैं। लगभग 15 मीटर ऊंचे, 153 मीटर लंबे और 33 मीटर चौड़े इस विशाल क्षेत्र को कवर करने वाले पीईबी स्ट्रक्चर को बिना किसी पिलर (खंभे) के सपोर्ट के खड़ा किया गया है। इसके चलते वर्कशॉप के अंदर ट्रेनों की आवाजाही के लिए बड़ा और खुला स्पेस मिल सकेगा। छत में विशेष पारदर्शी (ट्रांसलूसेंट) शीट का इस्तेमाल किया गया है, जिससे दिन के समय सूरज की प्राकृतिक रोशनी सीधे अंदर आएगी और बिजली की भारी बचत होगी। चार स्पेशल बे-लाइन तैयार, यहीं होगी मेट्रो की मरम्मत मेट्रो ट्रेनों की तकनीकी जांच और मरम्मत को सुचारू रूप से चलाने के लिए वर्कशॉप के अंदर कुल चार बे-लाइन बनाई गई हैं। इनमें से दो ‘इंस्पेक्शन बे लाइन’ होंगी, जहां मेट्रो ट्रेनों का नियमित निरीक्षण और तकनीकी फॉल्ट की जांच की जाएगी। वहीं, बाकी दो ‘वर्कशॉप बे लाइन’ पर ट्रेनों के मेंटेनेंस और भारी मरम्मत से जुड़े काम किए जाएंगे। ये चारों लाइनें मेट्रो के सुगम संचालन को व्यवस्थित रखने में मुख्य भूमिका निभाएंगी।
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CSA परिसर में कॉरिडोर-2 डिपो का काम तेज:बिना पिलर वाली छत से रोशन होगा वर्कशॉप, 99% निर्माण पूरा