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गोंडा में अवैध तरीके से खून उपलब्ध कराने के मामले में आरोपी साहेब आलम को अदालत से राहत नहीं मिली। बुधवार देर शाम करीब 7 बजे अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) नित्या पांडेय की अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। 12 जुलाई को गिरफ्तारी के बाद से साहेब आलम गोंडा मंडलीय कारागार में बंद है। साहेब आलम ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में जमानत याचिका दाखिल कर खुद को निर्दोष बताया था। उसने आरोप लगाया था कि रंजिश के चलते उसे इस मामले में फंसाया गया है। अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता और विवेचना में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर जमानत का विरोध किया। 12,500 रुपए लेकर रक्त उपलब्ध कराने का आरोप पुलिस के मुताबिक, साहेब आलम पर कोतवाली नगर क्षेत्र के एक अस्पताल में मरीज के लिए रक्त की जरूरत पड़ने पर 12,500 रुपए लेकर रक्त उपलब्ध कराने का आरोप है। आरोप है कि गलत रक्त उपलब्ध कराने के बाद वह पैसे वापस किए बिना वहां से चला गया। मामले में 11 जुलाई को रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसके बाद नगर कोतवाली पुलिस ने पूरे नेटवर्क की जांच शुरू की। विवेचना के दौरान साहेब आलम समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। ब्लड सेंटर के 20 कार्ड और नकदी बरामद पुलिस के अनुसार, साहेब आलम के कब्जे से ब्लड सेंटर के 10 पीले और 10 लाल कार्ड तथा 150 रुपए नकद बरामद किए गए। अन्य आरोपियों के कब्जे से भी बड़ी संख्या में ब्लड बैंक कार्ड, डिस्पोजल सिरिंज, मोबाइल फोन और नकदी बरामद होने का दावा किया गया है। केस डायरी देखने के बाद जमानत अर्जी खारिज अपर सत्र न्यायाधीश नित्या पांडेय ने पत्रावली और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद जमानत अर्जी निरस्त कर दी। इसके बाद साहेब आलम फिलहाल गोंडा मंडलीय कारागार में ही रहेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता बृजलाल तिवारी ने बताया कि जमानत का ठोस आधार नहीं मिलने पर अदालत ने अर्जी खारिज की है। आरोपी अब ऊपरी अदालत में जमानत के लिए अपील कर सकता है।
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अवैध खून कारोबार के आरोपी साहेब आलम की जमानत खारिज:12 जुलाई से जेल में बंद, 12,500 रुपए लेकर ब्लड उपलब्ध कराने का आरोप