एक साल बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण, न बनी नाली:सिद्धार्थनगर में व्यापारियों ने डीएम से की मुलाकात, 12 साल से नहीं हुई सफाई


सिद्धार्थनगर के लोटन बाजार में अतिक्रमण और जल निकासी की वर्षों पुरानी समस्या को लेकर उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन के पदाधिकारियों ने बुधवार को जिलाधिकारी से मुलाकात की। व्यापारियों ने उन्हें एक सामूहिक ज्ञापन सौंपकर बताया कि पूर्व में प्रशासनिक आदेश और राजस्व विभाग की रिपोर्ट के बावजूद आज तक अतिक्रमण नहीं हटाया गया है और न ही स्थायी नाली का निर्माण हुआ है। व्यापारियों ने बताया कि लोटन बाजार जिले का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। यहां करीब 10-12 वर्ष पूर्व बनी नाली नियमित सफाई के अभाव में पूरी तरह जाम हो चुकी है। सड़क और नाली पर अतिक्रमण के कारण बरसात के मौसम में बाजार में अक्सर जलभराव हो जाता है, जिससे दुकानों के सामने पानी भरने से व्यापार प्रभावित होता है। ग्राहकों और राहगीरों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि पिछले वर्ष 19 सितंबर को तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व विभाग ने अतिक्रमण का चिन्हांकन कर रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। हालांकि, लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी उस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। जवाबदेही तय करने की मांग उठाई ज्ञापन में सड़क से 20 फुट तक अतिक्रमण हटाने, स्थायी नाली का निर्माण कराने, नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने और जल निकासी की वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त, कार्रवाई में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग उठाई गई। जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने वालों में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन के जिलाध्यक्ष अजय कसौधन, लोटन ब्लॉक अध्यक्ष अनुराग कसौधन, वरिष्ठ महामंत्री रवि जायसवाल, महामंत्री ऋषि जायसवाल, उपाध्यक्ष सुनील उमर, उपाध्यक्ष कमलनयन सिंह, उपाध्यक्ष मंटू जायसवाल, मंत्री रवि जायसवाल, संगठन मंत्री पिंकू गुप्ता और अधिवक्ता यशपाल यादव प्रमुख रूप से शामिल थे। व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं है, बल्कि बाजार को अतिक्रमण मुक्त कराकर सुचारु यातायात और स्थायी जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। उन्होंने प्रशासन से जनहित में शीघ्र कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो व्यापारी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे।

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