Lipulekh India-China Trade | Gunji Traders Wait For Permit Update

भारत-चीन सीमा व्यापार में 14 भारतीय व्यापारियों को तकलाकोट की नई मंडी में दुकानें मिली।

लिपुलेख दर्रे से छह साल बाद शुरू हुए भारत-चीन व्यापार में भारतीय व्यापारियों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। चीन के तकलाकोट पहुंचे 14 भारतीय व्यापारियों को चीनी प्रशासन ने नई मंडी में दुकानें आवंटित कर दी हैं, जबकि 79 व्यापारी अभी भी चीन की अनुमति क

.

इन व्यापारियों का करोड़ों रुपए का सामान एक महीने से गुंजी में खुले में पड़ा है। बरसात के बीच सामान खराब होने की आशंका से व्यापारी चिंतित हैं।

इस साल भारत-चीन व्यापार के लिए कुल 134 आवेदन आए हैं। इनमें 93 व्यापारी और 41 हेल्पर शामिल हैं। 1 अगस्त को 16 भारतीय व्यापारी और 4 सहायक तकलाकोट मंडी पहुंचे थे। चीन ने फिलहाल उन्हीं व्यापारियों को अनुमति दी है, जो 2019 के व्यापार में शामिल थे और जिनका सामान तकलाकोट की दुकानों में पहले से रखा था।

तकलाकोट में पहले से रखा है भारतीय व्यापारियों का सामान।

तकलाकोट में पहले से रखा है भारतीय व्यापारियों का सामान।

पुरानी मंडी से सामान नई दुकानों में शिफ्ट किया

छह साल बाद तकलाकोट पहुंचे भारतीय व्यापारियों ने चीनी अधिकारियों की मौजूदगी में पुरानी मंडी में अपनी दुकानों के ताले खोले। यहां रखा सामान निकालकर उसे नई मंडी में पहुंचाया गया। भारतीय व्यापारियों को अब नई मंडी में ही दुकानें उपलब्ध कराई गई हैं।

हालांकि, जिन व्यापारियों को अभी अनुमति नहीं मिली है, उनका सामान गुंजी में ही रखा हुआ है। चीन से अनुमति मिलने के बाद ही इन व्यापारियों को तकलाकोट भेजा जाएगा और वे अपना सामान वहां ले जा सकेंगे।

पुरानी तकलाकोट मंडी में पसरा सन्नाटा

तकलाकोट पहुंचे एक व्यापारी ने सोशल मीडिया पर वहां का वीडियो साझा किया है। वीडियो में पुरानी मंडी में सन्नाटा पसरा नजर आ रहा है। भारत-चीन सीमा व्यापार सीमित अवधि के लिए होता है। जून से शुरू होने वाला व्यापार अक्टूबर तक चलता है। नवंबर में बर्फबारी शुरू होने से पहले व्यापारियों को वापस लौटना पड़ता है।

ऐसे में अगस्त बीतने के बावजूद बड़ी संख्या में व्यापारियों को अनुमति नहीं मिलने से उनके सामने व्यापार का समय कम होने की चिंता भी है।

79 व्यापारी अभी भी चीन की अनुमति का इंतजार कर रहे।

79 व्यापारी अभी भी चीन की अनुमति का इंतजार कर रहे।

गुंजी में पन्नियों से ढका करोड़ों का सामान

व्यापारियों ने इस बार व्यापार शुरू होने की उम्मीद में जून के अंतिम सप्ताह से ही अपना सामान गुंजी पहुंचाना शुरू कर दिया था। ट्रेड पास समेत अन्य प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद व्यापारी व्यापार शुरू होने को लेकर उत्साहित थे।

पहले तकलाकोट में व्यवस्थाएं नहीं होने और बाद में सीमित संख्या में व्यापारियों को अनुमति मिलने से स्थिति बदल गई। करोड़ों रुपए का सामान गुंजी में खुले में पड़ा है। बारिश से बचाने के लिए इसे पन्नियों से ढककर रखा गया है। व्यापारियों को डर है कि लंबे समय तक खुले में रहने से सामान खराब हो सकता है। उन्होंने भारतीय प्रशासन से मामले में ठोस पहल करने की मांग की है।

गुंजी में खुले में पड़ा करोड़ों का सामान, बारिश से बचाने के लिए इस तरह पन्नियों से ढका गया है।

गुंजी में खुले में पड़ा करोड़ों का सामान, बारिश से बचाने के लिए इस तरह पन्नियों से ढका गया है।

एसडीएम बोले- मेल मिलते ही भेजेंगे अगला दल

धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी ने बताया कि भारतीय व्यापारियों को दुकानें आवंटित करने के लिए चीन के पुरांग काउंटी प्रशासन से पत्राचार किया गया था। 14 व्यापारियों को नई मंडी में दुकानें मिल चुकी हैं। अन्य व्यापारियों को तकलाकोट भेजने के संबंध में अभी कोई मेल नहीं मिला है। चीन की ओर से अनुमति मिलते ही व्यापारियों के अगले दल को भेजा जाएगा।

चीन की अनुमति मिलते ही व्यापारियों का अगला दल तकलाकोट भेजा जाएगा।

चीन की अनुमति मिलते ही व्यापारियों का अगला दल तकलाकोट भेजा जाएगा।

2019 में 3 करोड़ से ज्यादा का कारोबार

भारत-चीन व्यापार समिति के अनुसार 2019 में करीब 250 भारतीय व्यापारी तकलाकोट पहुंचे थे। उस वर्ष करीब 3 करोड़ रुपए से अधिक का व्यापार हुआ था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार लगभग 1.25 करोड़ रुपए का निर्यात और करीब 1.90 करोड़ रुपए का आयात हुआ था।

इस बार सड़क, नई मंडी और बेहतर लॉजिस्टिक व्यवस्था के कारण कारोबार बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि व्यापारियों का कहना है कि भारतीय पक्ष को देरी से अनुमति मिलने के कारण इस साल शुरुआती कारोबारी अवसर काफी हद तक निकल चुके हैं।

————–

ये खबर भी पढ़ें :

पहली बार बिना सामान के चीन पहुंचे भारतीय व्यापारी: 6 साल बाद भारत-तिब्बत ट्रेड शुरू; 2019 से तकलाकोट में छूटा है करोड़ों का माल

उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से 6 साल बाद भारत-तिब्बत परंपरागत व्यापार शनिवार से फिर शुरू हो गया है। पहले दल में 16 भारतीय व्यापारी और 4 हेल्पर तिब्बत के तकलाकोट मंडी पहुंचे। खास बात यह रही कि इतिहास में पहली बार भारतीय व्यापारी बिना सामान के चीन गए। सीमा पर चीनी प्रशासन ने उनके दस्तावेजों की जांच के बाद प्रवेश दिया, जबकि व्यापारियों का सामान अब भी पिथौरागढ़ के गुंजी में रखा हुआ है। पढ़ें पूरी खबर…

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Newsmatic - News WordPress Theme 2026. Powered By BlazeThemes.