नई दिल्ली3 मिनट पहले
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FSSAI यानी भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने पान मसाला की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को बैन कर दिया है। नए नियमों के तहत कंपनियां अब सिर्फ प्लास्टिक-मुक्त पेपर, टिन या ग्लास कंटेनर में ही पान मसाला पैक कर बेच सकेंगी।
अब कंपनियों को नए ईको-फ्रेंडली विकल्पों की तरफ जाना होगा। FSSAI ने इस संबंध में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (पैकेजिंग) अमेंडमेंट रेगुलेशंस, 2026 को नोटिफाई कर दिया है। 10 अगस्त को भारत के राजपत्र में प्रकाशित होते ही ये नए नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।

9 आसान सवालों के जवाब में समझते हैं ये नए नियम क्या हैं, कंपनियों को क्या बदलाव करने होंगे और आम ग्राहकों पर क्या असर होगा…
सवाल 1: मुख्य खबर क्या है और FSSAI ने क्या नियम लागू किए हैं?
जवाब: FSSAI ने ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अमेंडमेंट रेगुलेशंस, 2026’ को नोटिफाई कर दिया है। इसके तहत पान मसाला की पैकेजिंग में किसी भी तरह के प्लास्टिक, पॉलीथीन, PVC, पॉलिस्टर या सिंथेटिक पॉलीमर के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है।
सवाल 2: प्लास्टिक-एल्युमिनियम फॉयल पैकेजिंग बैन क्यों की गई?
जवाब: इसके पीछे मुख्य वजह पर्यावरण की सुरक्षा है। प्लास्टिक और एल्युमिनियम फॉयल वाले पाउच सालों तक नष्ट नहीं होते और प्रदूषण बढ़ाते हैं। इस नियम का मकसद पान मसाला की पैकेजिंग को पूरी तरह प्लास्टिक फ्री और इको-फ्रेंडली बनाना है। यह फैसला पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के ‘प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016’ के प्रावधानों के तहत लिया गया है।
सवाल 3: अब कंपनियां पैकेजिंग के लिए क्या इस्तेमाल करेंगी?
जवाब: नए नियमों के मुताबिक, पान मसाला और गुटखा बनाने वाली कंपनियां अब सिर्फ प्लास्टिक-मुक्त पेपर, पेपरबोर्ड, सेल्यूलोज या अन्य प्राकृतिक रूप से मिलने वाले मटेरियल का उपयोग कर सकेंगी। इसके अलावा, FSSAI ने टिन के डिब्बे या कांच के कंटेनर्स को भी पैकेजिंग के लिए मंजूरी दी है।
सवाल 4: क्या कंपनी बाहर कागज और अंदर प्लास्टिक या चमकीली पन्नी लगा सकती है?
जवाब: नहीं। FSSAI ने इस पर साफ तौर पर रोक लगाई है। अगर कोई कंपनी नियमों से बचने के लिए बाहर से कागज का कवर लगाती है, लेकिन पाउच के अंदर नमी रोकने के लिए प्लास्टिक या एल्युमिनियम का इस्तेमाल करती है, तो उसे गैरकानूनी माना जाएगा। पैकेजिंग अंदर और बाहर, दोनों तरफ से पूरी तरह प्लास्टिक-फ्री होनी चाहिए।
सवाल 5: क्या इस तरह का चेंज पहली बार हुआ है?
जवाब: हां, पैकेजिंग के नियमों को लेकर यह एक बड़ा बदलाव है। दरअसल, साल 2018 के ‘खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) नियमों’ में संशोधन किया गया है। अब ‘पान मसाला’ को ‘शेड्यूल 4’ के तहत एक नई एंट्री के रूप में शामिल किया गया है। इस शेड्यूल में सरकार उन सामानों की लिस्ट रखती है, जिनके लिए पैकेजिंग मटेरियल के खास नियम और सुझाव तय किए जाते हैं।

सवाल 6: क्या पान मसाला या गुटखा बेचने पर भी प्रतिबंध लगा है?
जवाब: नहीं, FSSAI ने स्पष्ट किया है कि यह नोटिफिकेशन खास तौर पर सिर्फ पैकेजिंग नियमों के लिए है। प्रोडक्ट के तौर पर पान मसाला की बिक्री पर कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। यानी यह बाजार में बिकता रहेगा, बस इसके पाउच और डिब्बे बदल जाएंगे।
सवाल 7: नियम न मानने वालीं कंपनियों पर क्या एक्शन होगा?
जवाब: यदि कोई कंपनी नए नियमों का उल्लंघन करते हुए प्लास्टिक, सिंथेटिक पॉलीमर या एल्युमिनियम लेयर वाली पैकेजिंग का इस्तेमाल जारी रखती है, तो उस पर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट और ‘प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स’ के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें भारी जुर्माना लगाने से लेकर उत्पादन पर रोक और कंपनी का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
सवाल 8: क्या इससे गुटके या पान मसाला के दामों पर भी असर पड़ेगा?
जवाब: हां, इसके दामों में बढ़ोतरी की संभावना है। प्लास्टिक पाउच के मुकाबले पेपर, टिन या कांच की पैकेजिंग तैयार करना कंपनियों के लिए थोड़ा महंगा होता है। जब कंपनियों की पैकेजिंग कॉस्ट यानी लागत बढ़ेगी, तो वे इसका बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं, जिससे आने वाले समय में पान मसाला के दाम बढ़ सकते हैं।
सवाल 9: नए नियम कब से लागू माने जाएंगे?
जवाब: 10 अगस्त 2026 को राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ ही ये नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं। कंपनियों को अब तत्काल अपनी पैकेजिंग व्यवस्था बदलनी होगी।
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