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बाराबंकी के नवाबगंज नगर पालिका परिषद में 1.10 करोड़ रुपये की डेकोरेटिव लाइटें लगाने के प्रोजेक्ट में अनियमितताएं सामने आई हैं। ई-टेंडरिंग का लिफाफा खुलने से पहले ही चहेती फर्म से लाइटें लगवाने का मामला उजागर होने पर जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने इस पूरे प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी नगर पालिका नवाबगंज से वापस ले ली है। यह मामला शहर के मुख्य मार्ग (पुराने नेशनल हाईवे-28) पर पल्हरी चौराहे तक पोलों पर स्लप्चर और लाइटें लगाने से संबंधित है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, इस काम के लिए 7 अगस्त को टेंडर आवंटित होना था। हालांकि, टेंडर खुलने से लगभग एक सप्ताह पहले ही एक ‘सेटिंग’ वाली फर्म को बैकडोर से काम सौंप दिया गया और सड़क पर लाइटें लगा दी गईं। जब इस धांधली का खुलासा हुआ, तो नगर पालिका अध्यक्ष शीला सिंह के पति और अध्यक्ष प्रतिनिधि सुरेंद्र सिंह वर्मा ने मामले को दबाने का प्रयास किया। वे लगातार इसे ‘ट्रायल’ का नाम देकर सफाई देते रहे और अनियमितताओं पर पर्दा डालने की कोशिश करते रहे। सुरेंद्र सिंह वर्मा के स्पष्टीकरणों के बावजूद, जब यह मामला सुर्खियों में आया और धांधली की खबरें बढ़ने लगीं, तो जिलाधिकारी ने इसका गंभीर संज्ञान लिया। जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद टेंडर रद्द कर दिया गया और पूरे प्रोजेक्ट को नगर पालिका से लेकर लोक निर्माण विभाग (PWD) को सौंप दिया गया। अब इस काम के लिए PWD के माध्यम से नए सिरे से टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। इस प्रशासनिक कार्रवाई से उन अधिकारियों और ठेकेदारों के सिंडिकेट में हलचल मच गई है, जो इस फर्जीवाड़े में शामिल थे
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टेंडर खुलने से पहले लग गईं लाइटें:बाराबंकी में DM ने नवाबगंज नगर पालिका से छीना प्रोजेक्ट