नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के दो दोषियों को उम्रकैद:एटा में कोर्ट ने 50-50 हजार रुपए का लगाया जुर्माना


एटा में 2020 में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में कोर्ट ने दो दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोनों पर 50-50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। साथ ही कुल एक लाख रुपए की राशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में देने का आदेश दिया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 16 नवंबर 2020 को अलीगंज थाना क्षेत्र में हुई थी। 16 वर्ष से कम आयु की पीड़िता को जबरन शौचालय में बंद कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। इस दौरान आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की, गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी भी दी। मामले में थाना अलीगंज पर अपराध संख्या 395/2020 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में नगला सावा निवासी आकाश पुत्र हरिशंकर और अनिल कुमार उर्फ मंगली पुत्र शिवकुमार को आरोपी बनाया गया था। उनके विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 376-डी (सामूहिक दुष्कर्म), 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना), 323 (मारपीट), 504 (जानबूझकर अपमान), 506 (आपराधिक धमकी), पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 तथा एससी/एसटी एक्ट के तहत आरोप तय किए गए थे। सुनवाई के बाद न्यायालय ने दोनों आरोपियों को धारा 376-डी, 342, 504 और 506 आईपीसी के तहत दोषी करार दिया। सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दोषियों की आर्थिक स्थिति, वृद्ध माता-पिता और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए न्यूनतम सजा देने की मांग की। वहीं विशेष लोक अभियोजक ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए अधिकतम दंड देने की अपील की। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि इस प्रकार के अपराध पीड़िता के सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन पर स्थायी और गंभीर प्रभाव डालते हैं, इसलिए दोषी किसी भी प्रकार की सहानुभूति के पात्र नहीं हैं। अदालत ने दोनों दोषियों को धारा 376-डी आईपीसी के तहत आजीवन कारावास और 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इसके अलावा धारा 342 के तहत एक वर्ष का कठोर कारावास एवं 500 रुपये जुर्माना, धारा 504 के तहत दो वर्ष का कठोर कारावास एवं दो हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 506 के तहत दो वर्ष का कठोर कारावास एवं दो हजार रुपये जुर्माना भी सुनाया। न्यायालय ने निर्देश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी तथा जेल में बिताई गई अवधि का समायोजन किया जाएगा। निर्णय के साथ ही अदालत ने दोनों दोषियों पर लगाए गए कुल अर्थदंड में से एक लाख रुपये की राशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दिए जाने का आदेश दिया। साथ ही दोषियों को निर्णय के विरुद्ध अपील करने के उनके वैधानिक अधिकार से भी अवगत कराया गया।

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