रामपुर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बेड कम पड़े:24 बेड पर 36 मरीज, बेड के लिए भटकते रहे तीमारदार


रामपुर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में रविवार रात मरीजों की संख्या बढ़ने से बेड कम पड़ गए। रात करीब साढ़े नौ बजे इमरजेंसी में कुल 24 बेड थे, जबकि 36 मरीज भर्ती थे। ऐसे में कई मरीजों को बेड नहीं मिल सका और उन्हें बेंच पर लिटाकर इलाज करना पड़ा। भीड़ के कारण मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल स्टाफ को परेशानी का सामना करना पड़ा। बेड के लिए स्टाफ से गुहार लगाते रहे तीमारदार इमरजेंसी में मरीजों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्यकर्मियों पर भी काम का दबाव बढ़ गया। मरीज और उनके तीमारदार बेड के लिए स्टाफ से लगातार बात करते दिखे। कोई अपनी परेशानी बताकर बेड मांग रहा था, तो कोई जल्द इलाज शुरू करने की गुजारिश कर रहा था। सीमित जगह और संसाधनों के बीच स्टाफ मरीजों को उपचार देने में जुटा रहा।
बेंच पर लिटाकर किया गया इलाज बेड की कमी के चलते कुछ मरीजों को बेंच पर लिटाकर इलाज करना पड़ा। इमरजेंसी में महिलाएं, बच्चे और पुरुष बेंच पर उपचार कराते नजर आए। कम जगह में कई मरीजों का इलाज करने के कारण डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को भी दिक्कत हुई। बेटी को बेड नहीं मिलने से परेशान तीमारदार एक मरीज की तीमारदार बाबू ने बताया कि उनकी बेटी अलसिफा को इमरजेंसी में बेड नहीं मिला। उन्होंने कहा कि बेड नहीं मिलने से इलाज कराने में काफी परेशानी हो रही है। उनके मुताबिक, कई अन्य मरीज भी बेंच पर इलाज कराने को मजबूर हैं। इसी तरह कैलाश के परिवार वाले भी बेड के लिए परेशान रहे। परिजन मरीज को लेकर एक जगह से दूसरी जगह जाते रहे, लेकिन बेड नहीं मिला। आखिर में उन्हें बेंच पर ही इलाज कराना पड़ा। अस्पताल स्टाफ बोला- इलाज पहली प्राथमिकता इमरजेंसी में मौजूद मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि बेहतर इलाज के साथ पर्याप्त बेड की व्यवस्था भी होनी चाहिए। वहीं, जिला अस्पताल के इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर ने बताया कि मरीजों को उपचार देना उनकी पहली प्राथमिकता है और सभी को इलाज दिया जा रहा है।

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