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किडनी प्रत्यारोपण के लिए अब कानपुर और आसपास के जिलों के मरीजों को लखनऊ, दिल्ली या अन्य शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज को किडनी ट्रांसप्लांट की आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण (डीजीएमई) ने मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम-1994 के तहत मेडिकल कॉलेज को किडनी प्रत्यारोपण की परमिशन देते हुए पांच साल का पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी किया है। डीजीएमई की ओर से जारी आदेश के अनुसार, मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करने के बाद वहां उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों के आधार पर यह अनुमति प्रदान की गई है। यह पंजीकरण अगले पांच सालों तक प्रभावी रहेगा। साथ ही कॉलेज प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि यदि भविष्य में स्टाफ या चिकित्सा सुविधाओं में कोई कमी आती है तो इसकी जानकारी संबंधित प्राधिकरण को देना अनिवार्य होगा। प्रत्येक किडनी प्रत्यारोपण का विवरण हर महीने महानिदेशक कार्यालय और राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन के नोडल अधिकारी को भेजना भी कॉलेज की जिम्मेदारी होगी। मरीजों को कम खर्च में मिल सकेगा इलाज हैलट पीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभाग के अनुसार, अस्पताल में आने वाला हर चौथा किडनी मरीज प्रत्यारोपण का जरूरतमंद होता है। अब तक सरकारी स्तर पर यह सुविधा उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को दूसरे शहरों या प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता था, जहां इलाज पर लाखों रुपये खर्च होते थे। नई सुविधा शुरू होने से मरीजों को समय पर और कम खर्च में इलाज मिल सकेगा। उपकरणों की खरीद के लिए शासन को भेजा प्रस्ताव जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने इसे कानपुर के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि ट्रांसप्लांट से जुड़े उपकरणों की खरीद के लिए शासन को करीब डेढ़ करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। वहीं, हैलट पीजीआई के प्रभारी डॉ. मनीष सिंह ने कहा कि लंबे समय से इस सुविधा का इंतजार था। अब यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ मिलकर हैलट पीजीआई में किडनी प्रत्यारोपण करेंगे।
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कानपुर में अब होगा किडनी ट्रांसप्लांट:GSVM मेडिकल कॉलेज को मिली मंजूरी, मरीजों को दूसरे शहरों के नहीं काटने होंगे चक्कर