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गोंडा जिले में घाघरा नदी का जलस्तर पिछले 24 घंटों से स्थिर बना हुआ है हालांकि, जलस्तर में कमी या स्थिरता के बावजूद, तटीय इलाकों में नदी की कटान तेजी से जारी है। इस कारण किसानों की गन्ने, धान और अन्य उपजाऊ फसलें नदी में समा रही हैं। आज मंगलवार सुबह 9:30 बजे तक नदी में कुल 2,63,522 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। तरबगंज तहसील क्षेत्र के नवाबगंज स्थित दत्त नगर बाणी माझा और साखीपुर में घाघरा नदी की कटान काफी तेज है, जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। फूलचंद, संजय, रामदेव और रामदीन जैसे कई किसानों के फूस के मकान कटान की जद में आ गए हैं। इन परिवारों को अपने मकान हटाकर सुरक्षित स्थानों पर पलायन करना पड़ रहा है। नवाबगंज के माझा राठ में भी कई किसानों की अब तक 50 बीघा से अधिक फसल नदी में कटकर बह चुकी है। इसके अतिरिक्त, कर्नलगंज तहसील क्षेत्र के चांदपुर किटौली गांव में घाघरा नदी का पानी गांव के किनारे तक पहुंच गया है, जिससे ग्रामीण नावों का सहारा लेकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा रहे हैं। गोंडा जिला आपदा विशेषज्ञ राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले 24 घंटे में नदी का जलस्तर मात्र 2 सेंटीमीटर घटा है और अब यह स्थिर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटते जलस्तर के कारण ही नदी कटान कर रही है। बाढ़ खंड विभाग द्वारा कटान रोकने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। आज छोड़े गए पानी में गिरजा बैराज से 1,34,435 क्यूसेक, शारदा बैराज से 1,26,629 क्यूसेक और सरयू बैराज से 2,458 क्यूसेक पानी शामिल है। गोंडा बाढ़ खंड विभाग के अधिशासी अभियंता जय सिंह ने बताया कि नदी का जलस्तर रुका हुआ है लेकिन निचले इलाकों में नदी लगातार कटान कर रही है कटान को रोकने के लिए हम लोगों द्वारा काफी प्रयास किया जा रहा है लेकिन नदी काफी नीचे से कटान कर रही है इसलिए उसे रोकना नामुमकिन हो रहा है।
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गोंडा में घाघरा 24 घंटे से स्थिर:कटान हुआ तेज, फूस के मकानों तक पहुंची नदी, ग्रामीणों का पलायन शुरू