गोरखपुर4 मिनट पहले
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गोरखपुर में मासूम बच्ची से रेप और हत्या का मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के मामले में सख्त कार्रवाई में जुट गया है। इसी क्रम में वसूली, भ्रष्टाचार, लापरवाही और अन्य गंभीर आरोपों का सामना कर रहे 45 पुलिसकर्मियों को लाइनहाजिर कर दिया गया है। सोमवार की देर रात एसएसपी ने एक्शन लिया है।
इनके खिलाफ पहले से चल रही विभागीय जांच की स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी गई है। एसएसपी डॉ. कौस्तुभ का कहना है कि जिन मामलों में आरोप प्रमाणित होंगे, उनसे संबंधित पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी की संस्तुति शासन को भेजी जाएगी।
हाल की घटना से लिया सबक
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हाल की घटना ने पूरे विभाग को झकझोर दिया है। इसके बाद यह निर्णय लिया गया कि जिन पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप हैं, उनकी लंबित जांच प्राथमिकता के आधार पर पूरी कराई जाए। सभी संबंधित अधिकारियों से जांच की प्रगति रिपोर्ट तलब की गई है। जहां जांच धीमी है, वहां उसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। लाइनहाजिर किए गए 45 पुलिसकर्मियों के अलावा कई अन्य के खिलाफ भी भ्रष्टाचार, अवैध वसूली कर्तव्य में लापरवाही की शिकायतों की जांच चल रही है। जांच में यदि आरोप सही पाए गए तो उनके खिलाफ भी लाइनहाजिर से लेकर निलंबन अथवा विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। वरिष्ठ अधिकारी सभी लंबित मामलों की नियमित समीक्षा कर रहे हैं ताकि किसी भी स्तर पर दोषियों को बचने का अवसर न मिले।
गंभीर मामले में बर्खास्तगी तय
विभागीय जांच में दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मी का उल्लेख उनकी चरित्र पंजिका (सर्विस रिकॉर्ड) में भी किया जाएगा। इससे भविष्य में पदोन्नति और अन्य सेवा संबंधी लाभ प्रभावित होंगे। गंभीर मामलों में बर्खास्तगी की संस्तुति शासन को भेजी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि पुलिस की साख बहाल करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। विभाग में भ्रष्टाचार, अवैध वसूली या किसी भी प्रकार के दुराचार के लिए अब शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जा रही है। हाल की घटना के बाद पूरे महकमे को साफ संदेश दिया गया है कि कानून लागू कराने वाली पुलिस पर यदि कोई गंभीर आरोप साबित होता है तो उसके खिलाफ सामान्य कर्मचारी से भी अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी।
