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संभल में सोमवार को चेहल्लुम की पूर्व संध्या पर नूरियो सराय स्थित हाशमी स्कूल परिसर में मजलिस का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में अज़ादारों ने शिरकत की। मजलिस को खिताब करते हुए कम्बर अब्बास ने कर्बला के पैगाम को इंसानियत, सब्र, वफ़ा और इबादत का सबसे बड़ा संदेश बताया। कम्बर अब्बास ने कहा कि कर्बला केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी दर्सगाह है जहां से हर इंसान को सब्र, वफ़ादारी, इंसानियत और अल्लाह की इबादत का सबक मिलता है। उन्होंने जोर दिया कि इन शिक्षाओं पर अमल करने से जीवन सफल और सार्थक बन सकता है। उन्होंने अपने बयान में हज़रत अब्बास अलमदार की शहादत का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मौला अली अलैहिस्सलाम की तमन्ना थी कि हज़रत अब्बास कर्बला में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के मिशन में साथ दें। कम्बर अब्बास ने कहा कि हज़रत अब्बास ने अपने आका इमाम हुसैन की वफ़ादारी निभाते हुए फरात नदी पर पानी लाने के दौरान अपने दोनों हाथ कुर्बान कर दिए। इस तरह उन्होंने शहादत का सर्वोच्च दर्जा हासिल किया और मौला अली की तमन्ना को पूरा किया। मजलिस के अंतिम चरण में जब हज़रत अब्बास की शहादत का बयान किया गया तो माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। मौजूद अज़ादार भावुक हो गए और पूरे परिसर में मातमी फिज़ा छा गई। मजलिस के बाद हज़रत अब्बास के अलम का बरामद किया गया। अज़ादारों ने अलम की जियारत की और नोहाख्वानी व मातम कर हज़रत अब्बास को खिराज-ए-अकीदत पेश की। मंगलवार को चेहल्लुम के अवसर पर निकलने वाले मातमी जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों के शामिल होने की उम्मीद है। कार्यक्रम में नैय्यर अब्बास, मोहसिन रज़ा, पैकर संभली, शाने अब्बास, इशरत अब्बास, अली सादिक सहित कई अज़ादार मौजूद रहे।
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संभल में चेहल्लुम पूर्व संध्या पर मजलिस आयोजित:कर्बला के पैगाम पर चर्चा, हज़रत अब्बास की शहादत याद की गई