आढ़ती का लावारिश में पोस्टमॉर्टम कराने वाले 2 दरोगा सस्पेंड:पनकी-सचेंडी थानेदार के खिलाफ कार्रवाई, अब हत्या वाले एंगल पर जांच शुरू


कानपुर में जूही निवासी आढ़ती देवेश शुक्ला (45) की गुमशुदगी की जांच में घोर लापरवाही और उनके शव का लावारिश में पोस्टमॉर्टम कराने पर पुलिस कमिश्नर ने रविवार को कड़ा एक्शन लिया। पुलिस कमिश्नर ने लापरवाही करने वाले पनकी थाने के दरोगा विकास वर्मा और शरद कुमार को सस्पेंड कर दिया। इसके साथ ही सचेंडी थाना प्रभारी और पनकी थाना प्रभारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आदेश दिया है। अब एक महीने बाद पुलिस ने परिजनों के आरोप के आधार पर हत्या वाले एंगल पर जांच शुरू की है। डीसीपी वेस्ट की मानें तो जल्द ही पुलिस इस मामले का खुलासा करेगी। दोनों थानेदार और दरागाओं की घोर लापरवाही आई सामने डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि जूही निवासी आढ़ती देवेश शुक्ला 2 जुलाई को संदिग्ध हालात में लापता हो गए थे। उनके भाई चकरपुर मंडी में देवेश कुमार-योगेश कुमार संस के नाम से आढ़त चलाने वाले मनोज कुमार शुक्ला ने 5 जुलाई को सचेंडी थाने में चकरपुर मंडी के व्यापारी संजू पाल, उसके मुनीम टिंकू यादव और ऑटो चालक प्रांशु के खिलाफ अपहरण समेत अन्य गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सचेंडी पुलिस ने रिपोर्ट तो दर्ज कर ली, लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया। इधर पनकी पुलिस को 2 जुलाई को देवेश शुक्ला के घायल होने की जानकारी मिली थी, लेकिन पनकी इंडस्ट्रियल एरिया चौकी इंचार्ज विकास वर्मा ने मौके पर जाने की बजाए डायल-112 से ही घायल को सीएचसी में भर्ती कराने की बात कही। मौके पर भी जाना उचित नहीं समझा। डायल-112 के भी पुलिस कर्मियों ने गंभीर रूप से घ्ज्ञायल देवेश शुक्ला का गंभीर हालत में लावारिश में कल्याणपुर सीएचसी में एडमिट कराया। इसके बाद देवेश को वहां से उर्सला रेफर कर दिया गया। 7 जुलाई को देवेश की इलाज के दौरान मौत हो गई और पनकी थाने के दरोगा शरद कुमार ने बगैर कोई जांच-पड़ताल किए 72 घंटे बाद 10 जुलाई को लावारिश में पोस्टमॉर्टम कराने के बाद शव का अंतिम संस्कार करा दिया और जांच-पड़ताल से पल्ला झाड़ लिया। जबकि सचेंडी और पनकी बॉर्डर के थाने हैं, यानी दोनों की सीमा जुड़ी हुई है। पनकी थाना प्रभारी दिनेश कुमार बिष्ट को पता था कि सचेंडी से आढ़ती लापता है, उसकी तलाश की जा रही है, लेकिन क्षेत्र में घायल लावारिश की शिनाख्त तक करना उचित नहीं समझा। उधर सचेंडी थाना पुलिस ने भी एफआईआर दर्ज करके पल्ला झाड़ लिया और जिले में मिले लावारिश शवों से लापता कारोबारी का मिलान कराना तक उचित नहीं समझा और इस वजह से आढ़ती का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। इस पूरे मामले की जांच में अब सामने आया कि गंभीर रूप से घायल आढ़ती की सूचना मिलने पर पनकी इंडस्ट्रियल एरिया चौकी इंचार्ज मौके पर नहीं गए और पनकी थाने के दरोगा शरद कुमार ने लावारिश शव की शिनाख्त कराने का कोई प्रयास नहीं किया। इस वजह से दोनों दरोगाओं को शुक्रवार रात पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। जबकि सचेंडी थाना प्रभारी दीनानाथ मिश्रा और पनकी थाना प्रभारी दिनेश कुमा बिष्ट की घोर लापरवाही सामने आने पर विभागीय कार्रवाई और जांच का आदेश दिया है। पुलिस सोती रही, परिजनों ने खुद लावारिश शव तक पहुंचे आपको जानकार हैरत होगी कि सचेंडी थाने में आढ़ती देवश शुक्ला के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी पुलिस सोती रही और पनकी थाने की पुलिस घायल लावारिश की मौत के बाद भी उसका सुराग लगाना उचित नहीं समझा और शव का लावारिश में पोस्टमॉर्टम कराने के बाद फाइल को दबा दिया। इधर मृतक देवेश के भाई मनोज और मुकेश कचहरी में इसी मामले में तारीख पर सुनवाई के बाद कोतवाली थाने में बने फील्ड यूनिट यानी फोरेंसिक के ऑफिस पहुंचे। इस दौरान उन्हें पता चला कि 10 जुलाई को पनकी में लावारिश हालत में मिला शव देवेश शुक्ला का था। 7 जुलाई को उनकी मौत हुई और 10 को पनकी पुलिस ने लावारिश में पोस्टमॉर्टम व अंतिम संस्कार करवा दिया। इसके बाद दोनों भाइयों व परिवार के लोगों ने पुलिस कमिश्नर से सचेंडी व पनकी थाने की पुलिस की घोर लापरवाही की जानकारी दी। अब पुलिस कमिश्नर ने एक्शन लेते हुए दोनों दरोगाओं को सस्पेंड किया और थानेदारों के खिलाफ जांच का आदेश दिया है। इतना ही नहीं डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि वह खुद अब अपनी निगरानी में इस केस की जांच करा रहे हैं। अगर मर्डर हुआ है तो जल्द ही आरोपियों को अरेस्ट करके जेल भेजेंगे।

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