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मथुरा की बलदेव नगरी में गुरुवार को ब्रज के राजा श्री दाऊजी महाराज का जन्मोत्सव बड़े उल्लास और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। आराध्य के दर्शन करने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही दर्शन शुरू हो गए। श्री दाऊजी महाराज का विशेष पंचामृत स्नान, अभिषेक और आकर्षक श्रृंगार किया गया। हीरा-जवाहरात से सजे आराध्य के विशेष दर्शन श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण रहे। जन्मोत्सव के मौके पर मंदिर परिसर में समाज गायन, भजन, नफीरी वादन और नंदोत्सव का आयोजन हुआ। नफीरी की धुन पर महिला-पुरुष और युवतियां भजनों पर नाचते दिखे। सेवायतों और श्रद्धालुओं ने मिलकर जन्मोत्सव के पद गाए। मंदिर परिसर श्री दाऊजी महाराज और रेवती मैया के जयकारों से गूंज उठा। पूरा मंदिर ‘जय दाऊजी महाराज’ के जयघोष से गुंजायमान रहा। मंदिर को बहुत सुंदर ढंग से सजाया गया था। मंदिर में 108 वेदपाठी और विद्वानों ने विशेष रूप से श्री बलभद्र पाठ का आयोजन किया। इसके साथ ही एक खास हवन-यज्ञ भी कराया गया। नंदोत्सव के दौरान नारियल, फल और प्रसाद बांटे गए। समाज गायन के बाद दोपहर एक बजे दधिकांधा की अनोखी परंपरा निभाई गई। दही, हल्दी, केसर और मक्खन से बनी प्रसादी सेवायतों और भक्तों पर फेंकी गई। इसके बाद मंदिर की छत से नारियल, मेवा, फल और उपहार लुटाए गए। इन्हें पाने के लिए गोपों के समूह में होड़ मच गई। इस मल्लयुद्ध का फैसला साक्षात श्री दाऊजी महाराज करते हैं, ऐसा माना जाता है। गोप नारियल और उपहार लेकर श्री दाऊजी महाराज की परिक्रमा करते हुए ‘नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ जैसे पद गाते हुए अपने घर लौटे। बलदेव छठ के मौके पर क्षीर सागर कुंड में सेहरा विसर्जन की परंपरा भी निभाई गई। देहात के अलग-अलग इलाकों से आए हजारों लोगों ने अपने बेटे की शादी के ठीक एक साल बाद दूल्हे का सेहरा क्षीर सागर कुंड में विसर्जित कर पूजा-अर्चना की। बलदेव छठ को मोहर छठ के नाम से भी जाना जाता है।
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बलदेव नगरी में श्री दाऊजी महाराज का जन्मोत्सव मनाया:उल्लास के साथ हुआ आयोजन, दर्शन को उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब