लखनऊ में स्वर्ण समाज का विरोध प्रदर्शन:आरक्षण को आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग , व्यवस्था में बदलाव के लिए राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन


लखनऊ में रविवार को 4 : 00 बजे स्वर्ण समाज ने विरोध प्रदर्शन किया । जातीय आधार पर आरक्षण खत्म करके आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग को लेकर हजरतगंज चौराहे पर जमा हुए । आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग के प्रति प्रदर्शनकारियों ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर नारेबाजी की । संगठन के लोगों का कहना था कि जाति के आधार पर मिलने वाला आरक्षण समाज में कभी बदलाव नहीं लाएगा। ‘जरूरतमंदों को मिले आरक्षण का लाभ’ प्रदर्शनकारियों ने मांग किया कि आरक्षण का लाभ केवल आर्थिक रूप से कमजोर और वास्तविक जरूरतमंद लोगों को मिलना चाहिए । उनका आरोप था कि वर्तमान व्यवस्था में कई ऐसे लोग भी आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं, जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं , पीढ़ी दर पीढ़ी फायदा उठाते हुए आ रहे हैं । उन्होंने मांग किया कि पात्रता का आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति बनाई जाए, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों तक इसका लाभ पहुंच सके। आरक्षण व्यवस्था में सुधार कि मांग प्रदर्शन में शामिल शिवम ने कहा कि हर उस व्यक्ति को आरक्षण मिलना चाहिए जो वास्तव में इसका हकदार है।अब समय आ गया है कि आधार जांचने का पैमाना बदला जाए। उन्होंने कहा कि केवल जातीय प्रमाणपत्र के आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिति के आधार पर लाभ दिया जाना चाहिए। इस संबंध में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप कर आरक्षण व्यवस्था में सुधार करने की मांग की गई है। ‘आरक्षण देने वाली जातियों की संख्या बढ़ी’ शिवम ने कहा कि वर्ष 1950 में संविधान लागू होने के समय आरक्षण का दायरा सीमित था, जबकि वर्तमान में इसका दायरा काफी बढ़ गया है। उस समय लगभग 18 जातियां थी और आरक्षण 20% था। मौजूदा समय में आरक्षण 60% पहुंच चुका है और जातियों की संख्या 45 हो गई है। समय के साथ जाति को राजनीतिक मुद्दा बनाया गया, जिससे समाज में टकराव बढ़ा है । आरक्षण व्यवस्था का उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर लोगों का उत्थान होना चाहिए और इसी भावना के अनुरूप इसमें सुधार किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा।

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