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कानपुर के महाराजपुर में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई। आत्महत्या करने वाले राकेश कुमार के बजाय पंचायतनामा में उनके जिंदा छोटे भाई राजेश का नाम दर्ज कर दिया गया। पोस्टमार्टम हाउस में जब बाबू ने “राजेश की बॉडी अंदर कराओ” कहा तो खुद राजेश ने जवाब दिया, “साहब, मैं जिंदा हूं।” इसके बाद पंचायतनामा भरने वाले दरोगा को दोबारा बुलाकर दस्तावेज ठीक कराए गए, तब जाकर पोस्टमार्टम शुरू हो सका। पत्नी की बीमारी से परेशान थे, रात में लगा ली फांसी महाराजपुर थाना क्षेत्र के बम्बुइया गांव निवासी 52 वर्षीय राकेश कुमार मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। परिवार में पत्नी सीमा देवी, दो बेटे अमन और प्रशांत तथा बेटी नेहा हैं। परिजनों के मुताबिक पत्नी लंबे समय से ब्रेन संबंधी बीमारी से पीड़ित थीं और इलाज में लगातार खर्च होने से राकेश मानसिक तनाव में रहने लगे थे। शनिवार रात खाना खाने के बाद सभी सो गए। देर रात उन्होंने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर गमछे के सहारे पंखे से फंदा लगाकर जान दे दी। दरवाजा तोड़ा तो फंदे से लटका मिला शव कुछ देर बाद पत्नी किसी काम से कमरे में पहुंचीं तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी आवाज लगाने के बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो परिजनों ने दरवाजा तोड़ दिया। अंदर राकेश का शव फंदे से लटका मिला। सूचना पर महाराजपुर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम हाउस में खुली गलती रविवार को पोस्टमार्टम हाउस में पंचायतनामा पहुंचने के बाद बाबू ने दस्तावेज देखकर “राजेश की बॉडी अंदर कराओ” कहकर आवाज लगाई। इस पर साथ आए राजेश ने कहा, “साहब, मैं अभी जिंदा हूं, पोस्टमार्टम मेरे भाई राकेश का होना है।” दस्तावेज की जांच में मुख्य पृष्ठ पर मृतक की जगह राजेश का नाम दर्ज मिला। इसके बाद पंचायतनामा तैयार करने वाले दरोगा दिग्विजय को तत्काल बुलाया गया। दस्तावेज में संशोधन होने के बाद ही पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू हो सकी। परिजनों ने उठाए सवाल घटना के बाद परिजनों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इतनी गंभीर कानूनी प्रक्रिया में नाम जैसी बुनियादी गलती होना लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। यदि समय रहते यह त्रुटि पकड़ में नहीं आती तो आगे कई कानूनी दिक्कतें खड़ी हो सकती थीं। थाना प्रभारी बोले- नाम लिखने में हुई त्रुटि महाराजपुर थाना प्रभारी ने बताया कि मृतक पत्नी की बीमारी से परेशान था और इसी वजह से उसने आत्महत्या की। पंचायतनामा तैयार करते समय राकेश की जगह राजेश का नाम दर्ज हो गया था। त्रुटि का पता चलते ही दस्तावेज को तत्काल सही करा दिया गया। मामले में अन्य आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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कानपुर में जिंदा का भर दिया पंचायतनामा:मृतक का भाई बोला- साहब मैं जिंदा हूं, छोटे भाई का होना है पोस्टमॉर्टम