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रामपुर में जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण मामले में बुधवार को अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आज़म खान की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर रिट याचिका वापस ले ली गई। यह याचिका रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) की ध्वस्तीकरण कार्रवाई को चुनौती देते हुए दाखिल की गई थी। अब इस मामले की आगे की सुनवाई मंडलायुक्त की अदालत में होगी। दरअसल, आज़म खान की ओर से इस मामले में दो स्तरों पर कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही थी। एक अपील अपीलीय अधिकारी एवं मंडलायुक्त अंजनेय कुमार सिंह की अदालत में दाखिल की गई थी, जबकि एहतियात के तौर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी रिट याचिका दायर की गई थी। सोमवार दोपहर करीब तीन बजे मंडलायुक्त अंजनेय कुमार सिंह की अदालत ने जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर अंतरिम रोक (स्टे) लगा दी थी। इस राहत के बाद हाईकोर्ट में लंबित रिट याचिका की आवश्यकता समाप्त हो गई। इसी के चलते बुधवार सुबह निर्धारित सुनवाई से पहले आज़म खान के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट से रिट याचिका वापस लेने का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अब 38 भवनों से संबंधित पूरा विवाद मंडलायुक्त की अदालत में विचाराधीन रहेगा और वहीं आगे की सुनवाई की जाएगी। मंडलायुक्त द्वारा दिए गए अंतरिम स्थगन आदेश से फिलहाल जौहर विश्वविद्यालय प्रबंधन को राहत मिली है। उल्लेखनीय है कि मंडलायुक्त की अदालत से स्टे मिलने के बाद जौहर विश्वविद्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे छात्रों ने भी सोमवार रात करीब आठ बजे अपना आंदोलन समाप्त कर दिया था।
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जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर हाईकोर्ट से याचिका वापस:मंडलायुक्त से स्टे मिलने के बाद आज़म खान पक्ष का फैसला