![]()
धार्मिक नगरी वृंदावन के विशालतम श्री रंगनाथ मंदिर में बुधवार को आषाढ़ पूर्णिमा गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गज ग्राह लीला का भव्य मंचन किया गया। गरुण पर विराजमान भगवान रंगनाथ की जय जयकार से मंदिर परिसर अनुगुंजित हो उठा। भक्त और भगवान के संबंध को दर्शाने वाली इस लीला के दर्शन कर भक्त आनंद में डूब गए। इस लीला के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। सतयुग से जुड़ी है लीला गुरु पूर्णिमा पर्व पर दक्षिणात्य शैली के प्रसिद्ध रंगनाथ मंदिर में गज ग्राह लीला का मंचन किया गया । मान्यता है कि सतयुग में एक बार जलाशय में स्नान कर रहे गज ( हाथी) को जल के अंदर ग्राह( मगरमच्छ ) ने पकड़ लिया और जल के अंदर खींचने लगा। जब काफी प्रयास के बाद भी गज ग्राह की पकड़ से मुक्त नही हो पाया तो आर्तस्वर से भगवान रंगनाथ को पुकारा। अपने भक्त की कातर ध्वनि सुनकर भगवान रंगनाथ बिना चरण पादुका धारण किए गरुण पर सवार होकर आए और सुदर्शन चक्र से ग्राह का वध कर उसे मोक्ष प्रदान किया। 180 वर्ष से निभाई जा रही परंपरा मंदिर प्रबंधन द्वारा भगवान और भक्त के इस संबंध की रक्षा का प्रदर्शन करने वाली इस लीला का प्रति वर्ष मंचन किया जाता है। बुधवार को परंपरानुसार स्वर्ण निर्मित गरुण वाहन पर विराजमान होकर सुदर्शन चक्रधारी भगवान रंगनाथ की सवारी गर्भगृह से निकलकर पूर्वी द्वार स्थित पुष्करणी पर पहुंची। जहां मंदिर के सेवायतों ने भगवान का पाठ किया और कुंभ आरती कर नजर उतारी। इसके बाद गज ग्राह लीला की गई। आधा घंटे चली लीला करीब आधा घंटे तक चली इस लीला के अंत में भगवान द्वारा ग्राह का वध किया गया। मंदिर परिसर रंगनाथ भगवान की जय जयकार से गूंज उठा। उसके बाद भगवान की कुंभ आरती की गई। इसके बाद सवारी पुनः मंदिर में भ्रमण करने के बाद गर्भगृह के लिए रवाना हो गई। इस अवसर पर मंदिर के अनुज स्वामी ने बताया कि श्री रंगनाथ मंदिर में उत्सव की परंपरा है यहां हर दिन उत्सव होता है इसीलिए इसे दिव्यदेश कहा जाता है। यहां गज ग्राह की लीला का दर्शन मंदिर की स्थापना के साथ से ही चला आ रहा है। पुराणों में गजेंद्र मोक्ष लीला का वरण है। इसमें भगवान भक्त की करुण पुकार सुनकर किस तरह चले आते हैं और उनकी रक्षा करते हैं यह दिखाती है।
Source link
वृंदावन के रंगनाथ मंदिर में हुई गज ग्राह लीला:भक्त की पुकार पर गरुण पर विराजमान होकर आए भगवान, मंदिर परिसर हुआ जयकारों से गुंजायमान