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हेपेटाइटिस B के कारण जिंदगी और मौत से जूझ रहे बाराबंकी के 36 वर्षीय अबरार रिंकू अली को नई जिंदगी मिली है। गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचे मरीज का लखनऊ के मैक्स हॉस्पिटल में सफल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट किया गया। इस मुश्किल वक्त में मरीज की सगी बहन ने अपने लिवर का 53 फीसदी हिस्सा डोनेट कर भाई की जान बचाई। स्थानीय इलाज से नहीं मिला आराम बाराबंकी निवासी अबरार को तीन महीने पहले हेपेटाइटिस B संक्रमण के कारण लिवर की गंभीर बीमारी (DCLD) और पोर्टल हाइपरटेंशन का पता चला था। स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि उनके पाचन तंत्र से खून आने लगा था। स्थानीय स्तर पर दवाओं और एंडोस्कोपी के बावजूद जब हालत बिगड़ती गई, तो परिजन उन्हें लखनऊ लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच में पाया कि पेट, लिवर और तिल्ली के आसपास की नसें असामान्य रूप से सूज चुकी थीं, जो कि एडवांस लिवर फेलियर का संकेत था। 12 दिनों में मिली नई जिंदगी, बहन और भाई दोनों स्वस्थ मैक्स हॉस्पिटल में हेपेटो पैंक्रियाटो बिलेरी एंड लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के डॉक्टर वलीउल्लाह सिद्दीकी और उनकी टीम ने जांच के बाद तुरंत लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी। बहन ने दिया लिवर: मरीज की बहन ने निसंकोच अपने लिवर का दायां हिस्सा लगभग 53% डोनेट करने का फैसला किया। जटिल ट्रांसप्लांट सर्जरी के बाद मरीज का नया लिवर पूरी तरह से सही काम कर रहा है। इसके बाद बहन और भाई दोनों तेजी से रिकवर हो रहे हैं। डॉक्टर की सलाह हेपेटाइटिस B को न करें नजरअंदाज हेपेटाइटिस B धीरे-धीरे लिवर को दीमक की तरह खोखला कर देता है। समय पर पहचान न हो तो यह जानलेवा हो सकता है। अबरार के मामले में सही समय पर हुई जांच और ट्रांसप्लांट से उनकी जान बच सकी। जिन मरीजों का लिवर पूरी तरह खराब हो जाता है, उनके लिए ट्रांसप्लांट ही सबसे असरदार विकल्प है। डॉ. वलीउल्लाह सिद्दीकी (लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन)
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लखनऊ में बहन ने भाई को डोनेट किया लीवर:36 साल के युवक की बची जान, हेपेटाइटिस से पीड़ित था मरीज