ईरान पर सबसे बड़े हमले से पीछे हटे ट्रम्प:सलाहकारों ने चेतावनी दी, देश में इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ सबसे बड़े हमले को फिलहाल टाल दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने यह फैसला अपने शीर्ष सलाहकारों और कैबिनेट सदस्यों के साथ शुक्रवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया। इस दौरान मुख्य चिंता मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना के पास मौजूद एयर डिफेंस सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलों की भारी कमी को लेकर थी। इंटरसेप्टर खत्म होने का डर ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने निजी तौर पर सलाह दी थी कि ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाना संभव तो है, लेकिन इससे सेंट्रल कमांड के पास मौजूद इंटरसेप्टर मिसाइलें खतरनाक स्तर तक खत्म हो सकती हैं। अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल के अंत तक रक्षा विभाग 1,200 से ज्यादा पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें खर्च कर चुका है, जिनकी कीमत 4 मिलियन डॉलर प्रति मिसाइल से अधिक है। तब से स्थिति और खराब हुई है। जॉर्डन हमले के बाद बढ़ी चिंता हाल ही में जॉर्डन में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद चिंताएं और बढ़ गई हैं। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमले के दौरान एक बैलिस्टिक मिसाइल अमेरिकी सुरक्षा घेरे को भेदकर निकल गई थी। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अभियान बढ़ाया गया, तो अमेरिकी सैनिक, खाड़ी देशों के सहयोगी और महत्वपूर्ण ठिकाने ईरानी जवाबी हमलों के प्रति असुरक्षित हो जाएंगे। कूटनीति और दबाव की रणनीति व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा से कूटनीतिक समाधान के पक्ष में रहे हैं, लेकिन अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य या सहयोगियों के खिलाफ आतंकी गतिविधियां जारी रखता है, तो सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के लिए यही समझदारी है कि वह बातचीत के जरिए डील करे, वरना उसे अंजाम भुगतना होगा। आर्थिक दबाव और अन्य चुनौतियां ट्रंप के सलाहकारों ने चेतावनी दी है कि व्यापक युद्ध से वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, ऊर्जा संकट और शरणार्थी संकट पैदा हो सकता है। इसके अलावा, प्रशासन के भीतर यह संदेह भी है कि तेज सैन्य अभियान ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के बजाय उसे विदेशी खतरे के खिलाफ एकजुट कर सकता है। इसी दबाव को बनाए रखने के लिए शुक्रवार को ट्रेजरी विभाग ने ईरानी व्यवसायी बाबेक जंजानी के वित्तीय नेटवर्क से जुड़े 9 कंपनियों और 4 लोगों पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है।

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