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लखनऊ उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के ‘निराला सभागार’ में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘मां दुर्गा’ के सहयोग से एक पुस्तक विमोचन समारोह का आयोजन किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ लेखिका डॉ. अर्चना प्रकाश की तीन नई कृतियों—’मैं अयोध्या हूं’, ‘चमत्कारी कछुआ’ और संस्मरण ‘स्मृतियों के आईने में डॉ. शंभु नाथ’ का सर्वसम्मति से लोकार्पण किया गया । मुख्य अतिथि एवं पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने डॉ. अर्चना के लेखन की सराहना करते हुए कहा कि वे हमेशा लीक से हटकर अछूते विषयों पर कलम चलाती हैं। उन्होंने ‘मैं अयोध्या हूं’ को धर्म, संस्कृति और आत्मचिंतन की सजीव यात्रा बताया। वहीं, विशिष्ट अतिथि महंत देव्यागिरि ने इसे भावी पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक और प्रेरणादायक रचना करार दिया। कहानी संग्रह संस्कार और जीवन मूल्य गढ़ने वाला बाल साहित्य की महत्ता के बारे में बताते हुए प्रो. सुरेंद्र विक्रम ने कहानी संग्रह ‘चमत्कारी कछुआ’ को बच्चों में सकारात्मक संस्कार और जीवन मूल्य गढ़ने वाला बताया। इसके साथ ही डी.एन. लाल ने डॉ. शंभु नाथ के बहुआयामी व्यक्तित्व पर आधारित संस्मरण को साहित्य जगत के लिए एक अनमोल धरोहर कहा। समारोह में ये रहे मौजूद समारोह की अध्यक्षता कर रहीं वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री विद्या बिंदु सिंह ने लेखिका के रचनात्मक प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर मंच पर विशिष्ट अतिथि के रूप में सर्वेश अस्थाना, डॉ. अमिता दुबे और पद्मश्री अनिल रस्तोगी सहित अनेक गणमान्य प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
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डॉ. अर्चना प्रकाश की 3 पुस्तकों का विमोचन:साहित्यकार बोले- 'चमत्कारी कछुआ' बच्चों में जीवन मूल्यों का करेगा विकास