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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 42 वर्ष पुराने मारपीट के एक आपराधिक मामले में चार महिला अपीलार्थियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया, जबकि दो पुरुष अपीलार्थियों की सजा बरकरार रखी। यह मामला 20 सितंबर 1984 का है, जब जिला ललितपुर के थाना बाढ़ क्षेत्र में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच झगड़ा हुआ था। मन्नू लाल और उसके परिजनों ने आरोप लगाया कि बाबू, पुत्तू, हलकी, भजन लाल, बैजनाथ, रामानंद और कुछ महिलाओं सहित कुल 12 लोगों ने उनकी मक्का की फसल जबरन काटनी शुरू की और विरोध करने पर लाठी- दराती से हमला कर मारपीट की। 14 जून 1988 को 12 आरोपियों हुई थी सजा अपर सत्र न्यायाधीश, ललितपुर ने 14 जून 1988 को सभी 12 आरोपियों को धारा 147, 323/149 और 324/149 भारतीय दंड संहिता के तहत दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी, हालांकि प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट के तहत उन्हें तुरंत जेल नहीं भेजा गया था। इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की गई थी, जो लगभग 38 साल तक हाईकोर्ट में लंबित रही। इस दौरान छह अपीलार्थियों बाबू, पुत्तू, हलकी, बैजनाथ, राम दुलारी और संझली बहू (पुत्तू की पत्नी) का निधन हो गया, जिसके चलते उनके विरुद्ध अपील समाप्त कर दी गई। कोर्ट ने पाया कि मामला क्रास केस का न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने पाया कि यह मामला वास्तव में एक “क्रॉस-केस” था यानी दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ मामले दर्ज थे, और इसी घटना में विरोधी पक्ष के दो लोगों (जालिम और भागीरथ) की हत्या भी हुई थी। कोर्ट ने माना कि यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि विवादित जमीन व फसल किसकी थी, और न ही यह तय हो सका कि हमला किस पक्ष ने पहले शुरू किया । इसलिए इसे आपसी लड़ाई माना गया। गवाहों के बयानों में विसंगतियों के आधार पर अदालत ने पाया कि चार महिला अपीलार्थियों श्रीमती बड़ी बहू उर्फ कंचन देवी, संझली बहू (भजन लाल की पत्नी), मंझली बहू (बैजनाथ की पत्नी) और मंझली बहू (जालिम की पत्नी) के विरुद्ध सीधे तौर पर मारपीट में शामिल होने का पुख्ता सबूत नहीं है। अतः इन्हें बरी कर दिया गया। वहीं भजन लाल और रामानंद के विरुद्ध ठोस साक्ष्य पाए जाने पर उनकी सजा बरकरार रखी गई। दोनों को एक माह के भीतर अदालत में पेश होकर अच्छे आचरण के लिए बॉन्ड भरने और प्रोबेशन का लाभ लेने का निर्देश दिया गया है।
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42 साल पुराने मारपीट की आरोपी चार महिलाएं बरी:ललितपुर के मामले में पुरुष अपीलार्थियों की सजा बरकरार