दीपेंद्र द्विवेदी | कानपुर2 मिनट पहले
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कानपुर के जीएसवीएम (GSVM) मेडिकल कॉलेज के प्रसूति एवं स्त्री रोग (गायनेकोलॉजी) विभाग में गंभीर हालत वाली गर्भवती और प्रसूता महिलाओं के इलाज के लिए ‘हाई डिपेंडेंसी यूनिट’ (HDU) की शुरुआत की गई है। इस नई व्यवस्था से उन महिलाओं को 24 घंटे विशेषज्ञों की सीधी निगरानी और समय पर इलाज मिल सकेगा, जिनकी हालत नाजुक होती है लेकिन उन्हें वेंटिलेटर या आईसीयू (ICU) की सख्त जरूरत नहीं होती।
उत्तर प्रदेश में हर साल लाखों प्रसव होते हैं। हालांकि पिछले कुछ सालों में जच्चा-बच्चा की सुरक्षा में सुधार आया है, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग), हाई ब्लड प्रेशर (प्री-एकलम्पसिया), इंफेक्शन (सेप्सिस) और गंभीर एनीमिया जैसी बीमारियों के कारण कई बार महिलाओं की जान पर बन आती है।
अक्सर गंभीर जटिलताओं के ऐसे मामलों में मरीज बाल-बाल बचते हैं, जिन्हें डॉक्टरी भाषा में ‘मैटरनल नियर मिस’ कहा जाता है। डॉक्टरों का मानना है कि HDU की शुरुआत से ऐसे मामलों में समय रहते सही इलाज मिलेगा और जच्चा-बच्चा की मृत्यु दर में कमी आएगी।

24 घंटे मुस्तैद रहेगी डॉक्टरों की टीम
गायनेकोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रेनू गुप्ता ने बुधवार सुबह 9 बजे बताया कि, एचडीयू प्रसूति सेवाओं में एक बेहद मजबूत कड़ी का काम करेगी। यहाँ भर्ती होने वाली हाई-रिस्क (उच्च जोखिम) वाली गर्भवती महिलाओं और नई माताओं की हर पल ट्रैकिंग होगी। गंभीर लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज शुरू हो जाएगा, जिससे किसी भी तरह की अनहोनी को पहले ही रोका जा सकेगा।

मेडिकल कॉलेज में बढ़ीं बेहतर सुविधाएं
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला और उप प्राचार्य डॉ. ऋचा गिरी ने इस सुविधा को क्षेत्र के मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ा कदम बताया।
यूनिट के उद्घाटन के दौरान डॉ. सौरभ अग्रवाल, डॉ. नीना गुप्ता, डॉ. शैली अग्रवाल, डॉ. वंदना शर्मा समेत कई वरिष्ठ डॉक्टर, रेजिडेंट्स और नर्सिंग स्टाफ मौजूद रहा। सभी का मानना है कि यह नई सुविधा कानपुर और आसपास के जिलों से आने वाली गंभीर महिला मरीजों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं होगी।
