Lucknow Rail Coach Restaurant Gas Crisis

लखनऊ3 मिनट पहलेलेखक: विकास श्रीवास्तव

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लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन के बाहर स्थित रेल कोच रेस्टोरेंट गैस सिलेंडर की किल्लत से जूझ रहा है। 3 मार्च से गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण किचन के चूल्हे लगभग बुझ गए हैं। सिर्फ कोयले की भट्ठियां धधक रही हैं। इसकी वजह से रेस्टोरेंट का सामान्य रूप से नहीं चल पा रहा है।

सिर्फ कोयले की भट्‌ठियों पर बनने वालीं खाने-पीने की चीजें ही बन रही हैं। इसकी वजह से यहां काम करने वाले आधे कर्मचारियों को फिलहाल छुट्‌टी दे दी गई है। रेस्टोरेंट करीब 20 हजार रुपए प्रतिदिन घाटे में चल रहा है।

चारबाग रेलवे स्टेशन के बाहर ट्रेन के कोच की थीम पर रेल कोच रेस्टोरेंट है।

चारबाग रेलवे स्टेशन के बाहर ट्रेन के कोच की थीम पर रेल कोच रेस्टोरेंट है।

‘गैस सिलेंडर नहीं मिलेगा तो बंद करना पड़ेगा रेस्टोरेंट’

रेस्टोरेंट के मैनेजर विमलेश बताते हैं कि 3 मार्च से कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई बंद है। हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा है। सिर्फ कोयले की भट्‌ठी और तंदूर पर जो बन सकता है, वही बना रहे हैं। बाकी सभी गैस चूल्हे बंद पड़े हैं। इस वजह से हर दिन करीब 20 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है।

मैनेजर विमलेश ने बताया- जल्द ही गैस सिलेंडर नहीं मिलेगा, तो हमें मजबूरी में रेस्टोरेंट बंद करना पड़ सकता है।

मैनेजर विमलेश ने बताया- जल्द ही गैस सिलेंडर नहीं मिलेगा, तो हमें मजबूरी में रेस्टोरेंट बंद करना पड़ सकता है।

14 में से 7 कर्मचारियों की छुट्‌टी हुई

इस संकट का सबसे बड़ा असर यहां काम करने वाले कर्मचारियों पर पड़ा है। मुख्य शेफ विजय कश्यप बताते हैं कि काम ठप होने के कारण आधे स्टाफ को हटाना पड़ा। पहले यहां 14 लोग काम करते थे, लेकिन अब सिर्फ 7 ही बचे हैं। पिछले 10 दिनों से हम लोग ठीक से खाना भी नहीं बना पा रहे हैं।

मुख्य शेफ विजय कश्यप ने बताया- अगर यही हाल रहा तो कर्मचारियों की नौकरी खतरे में आ जाएगी।

मुख्य शेफ विजय कश्यप ने बताया- अगर यही हाल रहा तो कर्मचारियों की नौकरी खतरे में आ जाएगी।

निराश होकर लौट रहे हैं ग्राहक

रेस्टोरेंट में पहले हर समय ग्राहकों की भीड़ रहती थी। खासकर रात में यात्रियों और स्थानीय लोगों का जमावड़ा लगा रहता था। अब हालात बदल गए हैं। मेन्यू के ज्यादातर आइटम उपलब्ध नहीं हैं, जिससे ग्राहक निराश होकर वापस लौट रहे हैं।

तंदूर-भट्‌ठी पर सीमित खाना बनने की वजह से रेस्टोरेंट की पहचान और भरोसा दोनों पर असर पड़ रहा है।

रेल कोच रेस्टोरेंट में सामान्य दिनों में ग्राहकों की अच्छी-खासी भीड़ रहती थी। इस समय मेन्यू की सभी चीजें उपलब्ध नहीं होने के कारण ग्राहकों की संख्या में कमी आ गई है।

रेल कोच रेस्टोरेंट में सामान्य दिनों में ग्राहकों की अच्छी-खासी भीड़ रहती थी। इस समय मेन्यू की सभी चीजें उपलब्ध नहीं होने के कारण ग्राहकों की संख्या में कमी आ गई है।

हरदिन बढ़ रहा नुकसान

मैनेजर विमलेश का कहना है कि गैस की किल्लत ने रेस्टोरेंट की आर्थिक स्थिति को हिला कर रख दिया है। रोजाना नुकसान हो रहा है, जबकि खर्चे लगातार बने हुए हैं। ऐसे में प्रबंधन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक यह स्थिति झेली जा सकती है?

रेल कोच रेस्टोरेंट में यात्रियों के अलावा शहर के लोग भी खाने-पीने जाते हैं।

रेल कोच रेस्टोरेंट में यात्रियों के अलावा शहर के लोग भी खाने-पीने जाते हैं।

कर्मचारियों का भविष्य दांव पर लगा

शेफ विजय कश्यप ने बताया कि यह संकट सिर्फ रेस्टोरेंट तक सीमित नहीं है। इससे जुड़े कई परिवारों की आजीविका पर असर पड़ा है। जिन कारीगरों और कर्मचारियों की कमाई इसी पर निर्भर थी, उनके सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

अगर जल्द गैस सप्लाई बहाल नहीं हुई, तो यह रेल कोच रेस्टोरेंट कुछ दिनों के लिए बंद हो सकता है। ऐसे में कर्मचारियों के सामने संकट खड़ा हो जाएगा।

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“हमारे व्यापार को 100 साल हो चुके हैं, लेकिन इतना बड़ा संकट कभी नहीं देखा। गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा है और कारीगरों को कोयले व भट्ठी पर काम करने में काफी परेशानी हो रही है।” यह दर्द बयां किया लखनऊ के मशहूर टुंडे कबाबी के ग्रैंडसन अबुबकर ने। (पूरी खबर पढ़िए)

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