लखनऊ में ज्योतिष-वास्तु सम्मेलन:विशेषज्ञ बोले- ज्योतिष भाग्य नहीं, सही दिशा का मार्गदर्शक; वास्तु और संस्कार से संवरता है जीवन


लखनऊ में आनंदमय पावन वर्षायोग समिति के सहयोग से पूज्य उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर महाराज के सान्निध्य में एक ज्योतिष एवं वास्तु सम्मेलन आयोजित किया गया।इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, छात्र-छात्राएं, अभिभावक, व्यापारी, नौकरीपेशा लोग और युवा शामिल हुए। सभी ने अपने जीवन से जुड़े सवाल देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों और वास्तु विशेषज्ञों के सामने रखे और उनका समाधान प्राप्त किया। दिल्ली से आए जैन ज्योतिषाचार्य रवि जैन से विद्यार्थियों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता, व्यापारियों ने कारोबार में आ रही परेशानियों और अभिभावकों ने विवाह में हो रही देरी को लेकर प्रश्न पूछे।उन्होंने बताया कि ज्योतिष भाग्य बदलने का नहीं, बल्कि सही दिशा दिखाने का माध्यम है। सफलता के लिए परिश्रम,अनुशासन और सही समय पर लिया गया निर्णय सबसे महत्वपूर्ण है। बच्चों में संस्कारों को लेकर सवाल किए ज्योतिष एवं कर्मकांड विशेषज्ञ सुशील कुमार जैन से लोगों ने घर में अशांति, पूजा-पाठ और बच्चों में संस्कारों को लेकर सवाल किए।उन्होंने कहा कि नियमित पूजा, नमोकार मंत्र का जाप और परिवार का सकारात्मक माहौल घर में सुख-शांति लाता है। बच्चों के संस्कारों की शुरुआत परिवार से ही होती है। ग्वालियर से आए डॉ. हुकुमचंद जैन ने विवाह और संयुक्त परिवार के महत्व पर जोर दिया।उन्होंने बताया कि आजकल विवाह में संस्कार और परिवार की बजाय आय और पैकेज को अधिक महत्व दिया जा रहा है।पहले चरित्र,खान-पान और पारिवारिक मूल्यों को प्राथमिकता मिलती थी,जिससे वैवाहिक जीवन अधिक सफल रहता था।उन्होंने संयुक्त परिवार को समाज की सबसे बड़ी ताकत बताया। वास्तु पंचमहाभूतों के संतुलन पर आधारित है दिल्ली के वास्तुविद राजीव जैन ने वास्तु के वैज्ञानिक पक्ष को समझाया। उन्होंने बताया कि वास्तु पंचमहाभूतों के संतुलन पर आधारित है।रसोई जैसी अग्नि से जुड़ी व्यवस्था गलत दिशा में होने से स्वास्थ्य, व्यापार और पारिवारिक जीवन प्रभावित हो सकता है। सम्मेलन के अंत में उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर महाराज ने अपने विचार व्यक्त किए।उन्होंने कहा कि ज्योतिष जीवन में टॉर्च की तरह सही रास्ता दिखाता है, जबकि वास्तु जीवनशैली को संतुलित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि ज्योतिष और वास्तु तभी सार्थक हैं, जब व्यक्ति अपने आचरण,संयम, संस्कार और सद्विचारों को भी जीवन में अपनाए।

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