किसानों के 5% विकसित प्लॉट पर चला 'कमर्शियल खेल':अब होटल-शोरूम तक पर प्राधिकरण की नजर, पहले सार्वजनिक सूचना फिर नोटिस


किसानों को जमीन अधिग्रहण के बदले दिए गए 5 प्रतिशत विकसित प्लॉट अब बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र बनते जा रहे हैं। कई जगह इन प्लॉटों पर होटल, गेस्ट हाउस, शोरूम, गोदाम और अन्य कमर्शियल प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं। नोएडा प्राधिकरण ने इस पूरे मामले पर सख्त रुख अपनाया है। सीईओ कृष्ण करुणेश के निर्देश पर सभी आवंटियों को सार्वजनिक सूचना जारी की जाएगी। इसके बाद नियमों का उल्लंघन मिलने पर नोटिस से लेकर आवंटन निरस्त करने तक की कार्रवाई हो सकती है। सीमित व्यवसायिक गतिविधि कर सकते है
प्राधिकरण अधिकारियों के अनुसार, किसानों को दिए गए 5 प्रतिशत विकसित प्लॉट पर सीमित व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति है, लेकिन इसके लिए पहले प्राधिकरण से अनुमति लेकर कन्वर्जन चार्ज जमा करना अनिवार्य है। नियमानुसार आवंटी को प्लॉट की कुल लागत का 10 प्रतिशत कन्वर्जन शुल्क जमा करना होता है। इसके बाद ही निर्धारित हिस्से में व्यावसायिक गतिविधि की जा सकती है। बिना अनुमति होटल और कारोबार चल रहे
प्राधिकरण के संज्ञान में आया है कि नोएडा के कई गांवों में स्थित 5 प्रतिशत विकसित प्लॉटों पर बिना कन्वर्जन कराए ही बड़े पैमाने पर कमर्शियल गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कुछ स्थानों पर तो होटल चेन तक खुल चुकी हैं। इससे न केवल प्राधिकरण के नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। पहले जागरूकता, फिर सख्त कार्रवाई
सीईओ कृष्ण करुणेश ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सबसे पहले सभी आवंटियों को सार्वजनिक सूचना जारी कर 5 प्रतिशत विकसित प्लॉट से जुड़े नियमों की जानकारी दी जाए। इसके बावजूद यदि कोई आवंटी नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधि करता पाया जाता है तो उसे नोटिस जारी किया जाएगा। संतोषजनक जवाब न मिलने पर आवंटन निरस्त करने जैसी कठोर कार्रवाई भी की जा सकती है। अधिग्रहित जमीन के बदले मिला था प्लॉट
नोएडा प्राधिकरण किसानों की अधिग्रहित जमीन के बदले उन्हें 5 प्रतिशत विकसित प्लॉट आवंटित करता है। इसका उद्देश्य किसानों को पुनर्वास और आर्थिक सहारा देना है। हालांकि, समय के साथ इन प्लॉटों का बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उपयोग शुरू हो गया है। अब प्राधिकरण इस व्यवस्था को नियमों के दायरे में लाने की तैयारी में है।

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