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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सुल्तानपुर के करौंदी कला थाने में दर्ज एक एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए याची धीरज के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने विवेचक को पूरी केस डायरी के साथ तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को तय की गई है। सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि पुलिस ने डायल 112 पर दी गई सूचना और घटना की वास्तविक शिकायत को नजरअंदाज कर दिया। आरोप है कि संबंधित पुलिसकर्मी ने स्वयं वादी बनकर एफआईआर दर्ज की और सूचना देने वाले सहित दोनों पक्षों को आरोपी बना दिया। याचिका में यह भी कहा गया कि पुलिस ऐसी कार्रवाई कर वास्तविक पीड़ितों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को कमजोर कर रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, हाईकोर्ट के पूर्व आदेश पर सुल्तानपुर की पुलिस अधीक्षक चारू निगम व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित हुईं। उन्होंने याचिका में लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, न्यायालय ने याची को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए उसके खिलाफ गिरफ्तारी सहित किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी। न्यायालय ने विवेचक को अगली सुनवाई पर संपूर्ण केस डायरी के साथ उपस्थित होने का निर्देश भी दिया। याचिका के अनुसार, घटना के बाद सबसे पहले डायल 112 पर सूचना दी गई थी और थाने में लिखित तहरीर भी सौंपी गई थी। पुलिस घायल धीरज को इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र करौंदी कला ले गई, लेकिन उसकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। आरोप है कि बाद में संबंधित सब-इंस्पेक्टर ने स्वयं वादी बनकर एफआईआर दर्ज की और दोनों पक्षों को आरोपी बना दिया, जिसके बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।
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लखनऊ हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक:विवेचक को पूरी केस डायरी के साथ 22 जुलाई को तलब किया