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पुरी3 मिनट पहले
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ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 16 जुलाई, गुरुवार से शुरू होगी। यह भव्य उत्सव 24 जुलाई तक चलेगा, जिसमें 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। रथयात्रा को लेकर पुरी के होटल और लॉज पूरी तरह फुल हो चुके हैं।
जिला प्रशासन के मुताबिक, इस साल फरवरी से ही बुकिंग शुरू हो गई थी। मंदिर और रथयात्रा मार्ग के आसपास के होटल-लॉज की सबसे ज्यादा मांग है। खासकर जिन होटलों की बालकनी या खिड़की रथयात्रा मार्ग की ओर खुलती है, उनके लिए सबसे ज्यादा मारामारी है।
पिछले साल के मुकाबले होटल और लॉज का किराया 10 गुना तक बढ़ गया है। जिन लॉज का सामान्य किराया 1500 से 2000 रुपए होता है, उनका किराया रथयात्रा के दौरान तीन दिन के लिए 50 हजार रुपए तक पहुंच गया है। पूरे शहर में करीब 1200 होटल हैं।
रथयात्रा में पहली बार होंगे ये 4 बड़े बदलाव
- यात्रा मार्ग में एकरूपता: पहली बार पूरे रथयात्रा मार्ग की इमारतों को हल्के गुलाबी रंग से रंगा गया है। श्रीमंदिर और पूरे यात्रा मार्ग को भी सजाया गया है।
- इमरजेंसी इवैक्यूएशन कॉरिडोर: भीड़ या किसी आपात स्थिति में एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और राहत दल तेजी से पहुंच सकें, इसके लिए विशेष कॉरिडोर बनाए गए हैं।
- रियल टाइम भीड़ प्रबंधन: पहली बार श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग बनाए गए हैं, ताकि भीड़ को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सके।
- AI कैमरों से निगरानी: पूरी रथयात्रा पर पहली बार AI आधारित कैमरों, ड्रोन और रियल टाइम कंट्रोल रूम के जरिए लगातार नजर रखी जाएगी।
हावड़ा में प्रोफेसर की गोद बनती है भगवान जगन्नाथ का रथ
धर्म और आस्था की सीमाओं से परे पश्चिम बंगाल के हावड़ा में हर साल एक अनोखी रथयात्रा निकाली जाती है। यहां न तो रस्सी से रथ खींचा जाता है और न ही विशाल रथ सजाया जाता है।
इसके बजाय कोलकाता के सेंट पॉल कैथेड्रल मिशन कॉलेज के बांग्ला विभाग के प्रोफेसर डॉ. शेख मकबूल इस्लाम भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन के विग्रह को अपनी गोद में लेकर करीब 400 मीटर की परिक्रमा करते हैं। इस यात्रा में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई तीनों समुदायों के लोग शामिल होते हैं।
डॉ. इस्लाम 1992 से भगवान जगन्नाथ पर शोध कर रहे हैं और इस विषय पर 14 से अधिक किताबें लिख चुके हैं। 1996 से उनके घर में भगवान जगन्नाथ का विग्रह स्थापित है, जबकि 2009 से वे हर साल रथपूजा के अवसर पर इस अनूठी परिक्रमा का आयोजन कर रहे हैं।
डॉ. शेख बोले- शरीर ही रथ है, तो अलग रथ क्यों?
डॉ. शेख मकबूल इस्लाम इस परंपरा का आधार कठोपनिषद् के प्रसिद्ध श्लोक ‘आत्मानं रथिनं विद्धि, शरीरं रथमेव तु…’ को मानते हैं। उनके मुताबिक, इस श्लोक में शरीर को रथ, बुद्धि को सारथी और आत्मा को रथ का स्वामी बताया गया है। इसलिए जब शरीर ही रथ है, तो अलग रथ की जरूरत नहीं।
वे पूरी तरह शाकाहारी हैं और भगवान जगन्नाथ के लिए अपने घर में पुरी की परंपरा के अनुसार 35 प्रकार का सात्विक भोग बनाकर विधि-विधान से अर्पित करते हैं।
