लखनऊ में प्रो. सुखवीर सिंघल की कला विरासत हुई डिजिटल:दुर्लभ कृतियां और दस्तावेज अब ऑनलाइन उपलब्ध


बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट के प्रमुख चित्रकार प्रो. सुखवीर सिंघल की कला और ऐतिहासिक विरासत अब डिजिटल माध्यम से कला प्रेमियों तक पहुंचेगी। उनकी 112वीं जयंती के अवसर पर मंगलवार को उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी में ‘सुखवीर सिंघल डिजिटल आर्काइव’ का शुभारंभ किया गया। इस पहल का उद्देश्य उनकी दुर्लभ कलाकृतियों और अभिलेखीय दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के साथ उन्हें अध्ययन और शोध के लिए सुलभ बनाना है। यह आर्काइव भारतीय कला इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण सामग्री को भी शोधकर्ताओं तक पहुंचाएगा। डिजिटल आर्काइव शोध और संरक्षण का परिणाम फाउंडेशन की निदेशक प्रियम चंद्रा ने बताया कि यह डिजिटल आर्काइव कई वर्षों के शोध, संरक्षण और दस्तावेजीकरण का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल 20वीं सदी के भारतीय कला इतिहास पर नए शोध को गति देगी। उपाध्यक्ष गिरीश कुमार मिश्रा ने कहा कि प्रो. सुखवीर सिंघल ने अपने सृजन और समर्पण से भारतीय कला जगत में विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी विरासत को डिजिटल रूप में सहेजने का कार्य नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है। पहली बार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए गए हैं डिजिटल आर्काइव में वर्ष 1930 के दशक से लेकर वर्तमान तक की दुर्लभ सामग्री को एक मंच पर संजोया गया है। इसमें प्रो. सिंघल की चित्रकृतियां, प्रदर्शनी कैटलॉग, ऐतिहासिक तस्वीरें, पत्राचार, प्रकाशन, समाचार अभिलेख, प्रमाण-पत्र और संस्थागत दस्तावेज शामिल हैं। कई दस्तावेज पहली बार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए गए हैं। आर्काइव की प्रमुख धरोहरों में 1946 का टैगोर गोल्ड मेडल, 1943 का इलाहाबाद स्कूल ऑफ आर्ट्स प्रदर्शनी कैटलॉग, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान लेडी हैलेट का ऐतिहासिक पत्र, 1938 में कला भारती की स्थापना से जुड़े अभिलेख, ए.के हल्दार का प्रशस्ति-पत्र और ऐतिहासिक समाचार-पत्रों पर आधारित शोध सामग्री शामिल है। ये लोग शामिल हुए कार्यक्रम में राज्य ललित कला अकादमी के उपाध्यक्ष गिरीश कुमार मिश्रा और पूर्व अध्यक्ष सीताराम कश्यप ने डिजिटल आर्काइव का उद्घाटन किया। इस अवसर पर अकादमी की निदेशक श्रद्धा शुक्ला, सुखवीर सिंघल आर्ट फाउंडेशन की निदेशक प्रियम चंद्रा सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी और गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

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