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लखनऊ में भगवान जगन्नाथ के रथ को थाईलैंड के फूलों से सजाने की तैयारी है। 25-25 फीट ऊंचे रथ होंगे। रथ खींचने वाले श्रद्धालुओं को 256 तरह के प्रसाद बांटे जाएंगे। विंटेज कारों पर झांकियां निकाली जाएंगी। ये सब दृश्य राजधानी के अलग-अलग मंदिरों से 16 जुलाई को निकाली जाने वाली जगन्नाथ रथयात्रा में दिखाई देंगे। जगन्नाथ रथयात्रा में श्रद्धालुओं को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ को खींचने का सौभाग्य मिलेगा। चारबाग, डालीगंज, राजाजीपुरम, अलीगंज, चौक आदि की रथयात्रा प्रमुख यात्राओं में गिनी जाती हैं। इस्कॉन मंदिर का रथ करीब 25 फीट ऊंचा होगा। अलीगंज का रथ भी लगभग 25 फीट ऊंचा रहेगा। चौक क्षेत्र में निकलने वाले रथ की ऊंचाई करीब 9 फीट, माधव मंदिर के रथ की ऊंचाई 15 से 20 फीट के बीच रहेगी, जबकि राजाजीपुरम के रथ की ऊंचाई करीब 12 फीट होगी। रथ यात्रा की 4 तस्वीरें देखिए… कैसे निकाली जाएगी जगन्नाथ रथ यात्रा, क्या है तैयारी ? विंटेज कारों पर निकलेंगी झांकियां श्री राधा माधव सेवा संस्थान के प्रवक्ता अनुराग साहू बताते हैं- रथयात्रा 16 जुलाई को श्री माधव मंदिर, डालीगंज से निकाली जाएगी। शाम 4 बजे आरती के बाद भगवान जगन्नाथ को रथ पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया जाएगा। यात्रा डालीगंज से नजीरगंज, शंकर नगर, न्याय नगर, रामकृष्ण मठ, फैजाबाद रोड, बाबूगंज और डालीगंज पुल होते हुए वापस मंदिर पहुंचेगी। रथ को करीब पांच क्विंटल फूलों से सजाया जाएगा। विंटेज कारों पर राधा-कृष्ण, हनुमान और भगवान शंकर की झांकियां निकाली जाएंगी। अयोध्या का फरुवाही नृत्य दल, राजस्थान के लोक कलाकार, महाराष्ट्र के ढोल वादक और उज्जैन के महाकाल की डमरू ध्वनि यात्रा की शोभा बढ़ाएंगे। भगवान जगन्नाथ को चांदी का मुकुट और विशेष राजस्थानी पोशाक पहनाई जाएगी। देश-विदेश से मंगाए गए फूलों से उनका विशेष शृंगार होगा। रथयात्रा में चांदी की पारंपरिक झाड़ू से की जाएगी सफाई राजाजीपुरम में श्री जगन्नाथ रथयात्रा सेवा समिति की ओर से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा एक ही रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे। वहीं वृंदावन से आई भक्तों की टोली पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन करेगी। अलीगंज में श्री महावीर ट्रस्ट की ओर से निकाली जाने वाली रथयात्रा में चांदी की प्राचीन पारंपरिक झाड़ू से मार्ग की सफाई की जाएगी। वहीं, चौक में जगन्नाथ सेवा समिति की ओर से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अलग-अलग रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे। यात्रा में 11 ऊंट, 21 अन्य रथ और हाथी आकर्षण का केंद्र होंगे। शहर के पांच प्रमुख स्थानों से निकलने वाली रथयात्राओं के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन और जगह-जगह प्रसाद वितरण किया जाएगा। प्रदेश के कई जिलों से श्रद्धालु इसमें शामिल होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, सपा प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई प्रमुख हस्तियों को भी आमंत्रित किया गया है। सुबह 10 से 11 बजे के बीच भगवान जगन्नाथ पहुंचेंगे सुशांत गोल्फ सिटी स्थित इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष अपरिमेय श्याम प्रभु ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 16 जुलाई को रवींद्रालय, चारबाग से शुरू होगी। सुबह 10 से 11 बजे के बीच भगवान जगन्नाथ वहां पहुंचेंगे। श्रद्धालुओं के लिए दर्शन, प्रसाद और गर्मी को देखते हुए जलपान की व्यवस्था रहेगी। सांस्कृतिक कार्यक्रम, नाटक और भगवान जगन्नाथ की कथा का आयोजन भी होगा। भगवान को 56 प्रकार के भोग अर्पित किए जाएंगे। रथयात्रा का विश्राम हजरतगंज स्थित डीएम आवास के पास जहांगीराबाद पैलेस में होगा। थाईलैंड के फूलों से सजेगा रथ, 21 फीट का ध्वज होगा आकर्षण रथ को थाईलैंड के मंगाए गए फूलों से सजाया जाएगा। इसे फूलों के गुलदस्ते जैसा आकर्षक स्वरूप दिया जाएगा। यात्रा में सीता-राम, लक्ष्मण, हनुमान, राम दरबार, राधारमण, बांके बिहारी, अष्ट सखियां, नारद मुनि और हनुमान सहित कई झांकियां शामिल होंगी। भगवान शिव और भगवान जगन्नाथ के भक्तों के स्वरूप भी यात्रा का हिस्सा होंगे। वाद्य यंत्र, घोड़े, रंग-बिरंगे गुब्बारे, गुलाब के फूल और विशाल ध्वज यात्रा की शोभा बढ़ाएंगे। करीब 21 फीट ऊंचा भगवान जगन्नाथ का विशाल ध्वज भी विशेष आकर्षण रहेगा। इसे लहराने पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के स्वरूप दिखाई देते हैं। 50 हजार श्रद्धालु रथयात्रा में शामिल होते हैं अपरिमेय श्याम प्रभु ने बताया कि हर किसी के लिए पुरी जाकर रथयात्रा में शामिल होना संभव नहीं होता। इसलिए भगवान जगन्नाथ की कृपा से लखनऊवासियों को भी रथ खींचने का अवसर मिलता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से 16 जुलाई को रथयात्रा में शामिल होने की अपील की। उन्होंने बताया कि इस्कॉन मंदिर से हर वर्ष करीब 50 हजार श्रद्धालु रथयात्रा में शामिल होते हैं। आयोजन में 500 से अधिक स्वयंसेवक सक्रिय रहते हैं। उन्नाव, बाराबंकी, गोंडा, सुल्तानपुर, लखीमपुर, कानपुर, इटावा और प्रयागराज समेत कई जिलों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्रशासन से समय पर रूट डायवर्जन लागू करने और बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का भी अनुरोध किया गया है।
256 प्रकार के व्यंजनों का महाप्रसाद संयोजक करुण कृष्ण दास ने बताया कि रथयात्रा का आयोजन श्री वैष्णवी देवी सेवा संस्थान की ओर से किया जा रहा है। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा एक ही रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे। वृंदावन से आई भक्तों की टोली महामंत्र का संकीर्तन करेगी। हर वर्ष करीब पांच से छह हजार श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं। यात्रा के समापन पर कढ़ी-चावल, बूंदी और आलू के पकौड़े का प्रसाद वितरित किया जाएगा। भगवान को अर्पित 256 प्रकार के व्यंजनों का महाप्रसाद भी श्रद्धालुओं में बांटा जाएगा। करुण कृष्ण दास ने बताया कि वर्ष 2005 से पंजीकृत श्री वैष्णवी देवी सेवा संस्थान इस वर्ष 12वीं भव्य रथयात्रा निकाल रहा है। यात्रा राजाजीपुरम सेक्टर-12 स्थित अमर बलिदानी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल पार्क से शुरू होगी। दोपहर 12:30 बजे राजभोग, शाम 4:30 बजे आरती और शाम 5 बजे रथयात्रा शुरु होगी। इस वर्ष रथयात्रा का विषय ऊर्जा संरक्षण रखा गया है। श्रद्धालुओं को ऊर्जा बचाने की शपथ दिलाई जाएगी और निजी वाहनों का कम उपयोग करने का संदेश दिया जाएगा। वर्ष 1929 से निकाली जा रही रथयात्रा श्री महावीर ट्रस्ट के सचिव राजेश पांडे ने बताया कि ट्रस्ट का पुनर्गठन वर्ष 2022 में हाईकोर्ट के निर्देश पर किया गया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 1929 से रथयात्रा निकाली जा रही है और आज भी उसी पारंपरिक रथ का उपयोग किया जाता है। कपूरथला स्थित जगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं को गोद में उठाकर रथ तक लाया जाता है। इसके बाद चांदी की प्राचीन पारंपरिक झाड़ू से मार्ग की सफाई की जाती है। विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद रथयात्रा शुरू होती है। रथयात्रा कपूरथला से अलीगंज होते हुए चंद्रलोक कॉलोनी स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुंचती है। पहले मंदिर का मुख्य द्वार छोटा होने के कारण रथ को बाहर ही रोकना पड़ता था, लेकिन अब मुख्य द्वार बड़ा होने से रथ को मंदिर परिसर के अंदर ले जाया जाता है। वहां पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं को पुनः मंदिर में विराजमान कराया जाता है। रथयात्रा करीब 150 वर्षों से लगातार निकाली जा रही जगन्नाथ सेवा समिति के मंत्री सुभाष मिश्रा ने बताया कि यह लखनऊ की सबसे पुरानी रथयात्राओं में से एक है, जो बीते करीब 150 वर्षों से लगातार निकाली जा रही है। रथयात्रा चौक स्थित बड़ी काली जी मंदिर से शुरू होकर अकबरी गेट, चौक चौराहा सहित विभिन्न मार्गों से होकर गुजरती है। सबसे आगे भगवान बलभद्र का रथ चलता है, उसके पीछे माता सुभद्रा और सबसे अंत में भगवान जगन्नाथ का रथ रहता है। यात्रा में 11 ऊंट, 21 अन्य रथ, धार्मिक झांकियां, हाथी, विशाल ध्वज और चार से पांच बैंड भी शामिल होते हैं। उन्होंने बताया कि रथयात्रा शुरू होने से पहले भगवान का पूजन, आरती, संत भोज, कन्या भोज और भंडारे का आयोजन किया जाता है। शहर में 50 से 60 स्थानों पर श्रद्धालु रथयात्रा का स्वागत करते हैं। विभिन्न स्थानों पर कढ़ी-चावल, पूड़ी-सब्जी सहित प्रसाद वितरित किया जाता है। अकबरी गेट क्षेत्र में मुस्लिम समाज के लोग भी रथयात्रा का स्वागत करते हैं, जो लखनऊ की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल माना जाता है।
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भगवान जगन्नाथ के रथ को थाईलैंड के फूलों से सजाएंगे:इस्कॉन की यात्रा में 50 हजार लोग खींचेगे रथ, राजाजीपुरम में 256 तरह के प्रसाद बंटेंगे